Friday, June 13, 2014

कौन होने फूटबाल के अगले पॉल बाबा

कौन होने फूटबाल के अगले पॉल बाबा 
दुनिआ के सबसे पसंदीदा खेल फूटबाल में वर्चस्व की जंग शुरू हो चुकी है. करोड़ों लोग ब्राजुका ( वर्ल्ड कप  आधिकारिक गेंद) की धुन पर नाचने के लिए पूरी दुनिआ से ब्राज़ील पहुंचे हैं. यूरोप, दक्षिण अमेिका, एशिया द्धर्ति के हर हिस्से में सिर्फ फूटबाल की दिखाई दे रही है. पिछले वर्ल्ड कप में अपनी सटीक भविष्वाणी से सबको चकित कर देने वाले पॉल ओक्टापुस बाबा ( समुद्री जीव )  प्रसंसकों के साथ-साथ सट्टे बाजों को भी बहुत याद आएंगे?  अफ्रीका में हुए वर्ल्ड कप में जर्मनी के इस समुद्री जीव से १३ मैचों  में से ११ मची में सटीक भसहस्यवाणी कर लोगों को हत्प्रभ कर दिया. जिसके बाद पॉल के ट्रेनर ने कहा की लोग अपनी भूख मिटने के लिए इतने अच्छे भविष्वक्तव को मार देते हैन।हुमे उन्हें बचन चाइये.जिसके बाद  पसंसकों, ओलिवर वेलेनिक और जर्मनी के सफल प्रयासों से जर्मनी में ऑक्टोपस का अच्छे किया गया ताकि वे इस बार अपनी टीम के लिए सटीक  भविष्वाणी  कर सकें। पॉल ऑक्टोपस के साथ साथ पिछले वर्ष मगरमक्मगरमच,तोता और गए का बछड़ा भी भविष्वक्ताओं में शामिल हुए थे लिकं सटीक भविष्वाणी सिफर बब पॉल ही कर. जीव जानवरों  भविष्वाणी को देखते हुए फूटबाल के लिए पहचाने जानने वाले देशों ने कई जीव जानवरों को भवसिहवा दक्षने की प्रशिख्सन देना शुरू कर दिया था. इस वर्ष भी ब्राज़ील ने बड़े मुंह वाले कछुए केबेको को को एक पूल में रख्कजर प्रशिखां दिया है. ब्राज़ील के फूटबाल प्रेमियों का कहना है की हमारा केबेको जर्मनी के ऑक्टोपस को कड़ी टक्कर देग. इससे अच्छी भविष्या वाणी को नै काट. सबको तो इसका  उदाहरण भी दे. ब्राज़ील और क्रोतिा के मैच में सबको ने सटीक भवशवाणी कर प्रसंसको का दिल जीत लिया है. फूटबाल में  परिणामो की दिलचस्पी  आलम ये है की इस वर्ष ब्रिटेन, जर्मनी ब्राज़ील जिअसे देशो में तो जू में कई जानवरों को फूटबाल की बारीकियां सिखाई जा रही है. ताकि वे परिणाम  सके. इनमे ज़ेबरा, चिम्पेंजी, तोता कई पसु शामिल हैं. पॉल ओक्टाप्सा भले ही अब नहीं रहे लेकिन उनके याद में जर्मनी में हजारों ओक्टापास को सटीक भविष्वाणी के लिए तैयार किया जा  है,  इतना ही नहीं अरब देशों में भी फूटबाल का फीवर चढ़ा हुआ है. यहाँ भी फूटबाल परिणामों पर भविष्वाणी की जा रही है. अरब फूटबाल में ऊँट के  माध्यम से खैंचने वाली चार  बानी गई है जिसमे शाहीन नाम दिया गया है. द सन के मुताबिक  पेले नाम के पिरान्हा को भी भविष्वक्ताओं की क़तर में खड़ा किया। जो विभिन देषो इ रंगो वाली मछली खलर परिणाम की जानकारी देग. चीन में बेबी पांडा को भविशव की बरिक्या बताई जा रही है। चीन में आम तौर पर टेबल टेनिस और लॉन टेनिस परिणाम जानने के लिए बेबी  जाती है.  ऑक्टोपस तो ससे जयदा चर्चित है. इसके साथ ही पिछले वर्ष वर्ल्ड्स उप  यूरो कप कम परिणाम बताकर चर्चाओं में आये नेल्ली नामक हाथी  प्रसंसको को परिणाम की जानकारी देग. नेल्ली नमक हाथी नेट पर बाल को किक मरकर परिणाम बतएगा. नेल्ली की बहविशवाणी तो जर्मनी और पुर्तगाल को अगले दौर में अख्ति है. उक्रैन में एक सूअर को  तैयार किया जा. कीव प्रशाहश का कहना है की ये सूअर रोज शाम को ४ बजे परिणाम बताता  है. इंग्लैंड टीम की भविष्या वाणी की जिम्मेदारी रू नामक एक कुत्ते पर है.  खिलाडियों को रू नमक वूलडोग को भविषयवानी पर पूरा भरोसा है. रू अलग अलग देशो की बोल में से खाना खरकर जीत की. फूटबाल के परिणामो में फूटबाल पंडित और जीव जानवरों की भमिकाअहम हो गई है. पॉल ऑक्टोपस अपनी भविष्वाणी के जरिये पूरी दुनिआ को  न केएल अपना दीवाना बांया बल्कि अन्य जीव   धारणरा को बजी बादक दिता है। भारत में भले हिउ ये सब अभी दूर की बात है लेकिन बेहतरीन फुटबॉलर, के बीच कई जीव जानवर हैं जो इस पुरे वर्ल्ड कप में छाए रहेंगे. इनकी सटीक भविष्वाणी कई देशी में इनके मंदिर बना 

Monday, June 6, 2011

"कैप्टन कूल" सपनों की उड़ान जारी.........

कैप्टन कूल इस समय कूल कूल नजर आ रहे है , उनके सपनो की उड़ान थमने का नाम ही नही ले रही है! पहले टीम इंडिया को २८ बर्षो के लम्बे अंतराल के बाद विश्व विजेता का गौरव दिलाना और अब अपनी कप्तानी में चेन्नई सुपर किंग्स को आई पी एल का लगातार दूसरी बार ताज दिलाना महेंद्र सिंह धोनी की ना थमने वाली सपनो की उड़ान को दर्शाता है! एतिहासिक पुरुष की श्रेणी में शुमार किये जाने वाले माही ने बहुत कम समय में उस शिखर को छू लिया जिसको छूने के लिए क्रिकेटर अपनी सारी जिंदगी लगा देता है, लेकिन माही ने सपनो की उड़ान में सफ़र करने से पहले मेहनत और जूनून से उन सपनो को बुना जो सिर्फ आज उनके है! २०-२० विश्व कप को पहली बार अपने घर लाना भी उनके सपनो में शामिल था! उनके सपनो की लम्बी शायद अब रूकने वाली नही है! कैप्टन कूल हेलीकाप्टर शोट के सहारे अपनी सफलता को नया आयाम देना चाहते है जबकि उनके प्रसंसक फिर से उनका दनदनाता हेलीकाप्टर शोट देखना चाहते है!



कैप्टन कूल की कलाकारी, चेन्नई ने फिर बाजी मारी-चेन्नई सुपर किंग्स ने आई पी एल का चौथा संस्करण अपने नाम कर यह दिखा दिया की विजेता बनने के लिए सिर्फ तेजतर्रार बल्लेबाजी की काफी नही कई बार खेल दिमागी रणनीति से भी जीता जाता है! कैप्टन कूल महेंद्र सिंह धोनी ने अपनी दिमागी रणनीति व यकायक फैसला लेने की उनकी कला ने



के खिलाफ खेले गए फ़ाइनल में कुछ ही समय में परिवर्तन ला दिया! चेन्नई के द्वारा रखे गए 205 रनों के विशाल स्कोर का पीछा करने उतरी रोंयल चेलेंजर्स माही के दाव पेंच के बीच उलझ कर 147 रन ही बना पाई!माही की दिमागी कसरत उस समय दिखी जब मैच शुरू होने के कुछ ही समय में गेंद केरम बाल एक्सपर्ट रामचंद्रन आश्विन को सौंप दी गई! आश्विन के पहले ओवर की पहली ही गेंद केरेबियाई तूफ़ान को गच्चा दे सीधे धोनी के दस्तानो में चली गई! गेल के सफ़र का ये सबसे खराब प्रदर्शन था जिसने बेंगलूरू को हार के कगार पर ला खड़ा किया! गेल के टीम में रहते बेंगलूरू पदक तालिका में सबसे ऊपर नजर आ रहा था लेकिन आश्विन ने फ़ाइनल में सब कुछ बदल डाला! बेंगलूरू को हराने में चेन्नई के ओपनर मुरली विजय के 52 गेंदों पर 95 रन व माइक हसी के 45 गेंदों पर 63 दोनों के 159 रनों की साझेदारी अहम् साबित हुई!
गेल की तूफानी रेल- केरेबियाई हीटर क्रिस गेल जिनके आई पी एल में शामिल होते ही तूफ़ान की तरह गर्जनाएं होने लगी! हर कोई उनकी बल्लेबाजी से वाकिफ था ! वेस्टइंडीस बोर्ड से बाहर किये जाने के बाद उनकी निगाह आई पी एल पर टिकी थी उनको उम्मीद थी की नीलामी में उनकी भी बोली लगे जायेगी लेकिन ऐसा नही हुआ! उन्हें शुरू में किसी भी टीम ने नही ख़रीदा लेकिन बेंगलूरू के मालिक विजय माल्या ने उन पर बीच में दाव खेल कर आई पी एल में रोमांच को बढ़ा दिया! गेल ने भी माल्या को निराश नही किया और आते ही पहले मैच में ताबड़तोड़ शतक के जरिये अपने मंसूबे दर्शा दिए! गेल ने अपनी इस ताबड़तोड़ पारी में छक्कों की बारिश करते हुए एक मैच में सबसे ज्यादा छक्के लगाने का रिकॉर्ड भी कायम किया! आई पी एल के इस सीजन में गेल के आग उगलते बल्ले ने 12 मैच में 44 छक्के लगाकर सर्वाधिक छक्के का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया! गेल के आई पी एल में आते ही बेंगलूरू टीम की किस्मत गेल से जुड़ गई थी उनके आने के बाद बेंगलूरू ने लगातार आठ मैच में जीत दर्ज करके सबसे ऊपर नजर आ रहा था! गेल की तूफानी रेल शायद किसी से नही नही रुकने वाली थी! गेल ने आई पीएल का नजारा बदलते हुए अपनी तूफानी पारियों के दम पर 12 मैच खेलकर सर्वाधिक 608 रन बनाकर ओरेंज को अपने नाम किया! उनकी इस ओरंज केप में दो शतक, तीन अर्धशतक शामिल थे ! वाकई ये केरेबियाई हीटर गेल की रेल थी जिसने हर मैच में प्रसंसकों को अपनी रफ़्तार से रूबरू कराया लेकिन फ़ाइनल में बेंगलूरू की नैया पार नही लगा सके! आश्विन की केरम बाल ने गेल की रेल को पटरी पर चढ़ने से पहले ही उतारदिया!

बेल्थाती की खोज- आई पी एल का चौथा सीजन बेल्थाती की खोज के नाम रहा! चौथे सीजन में कई रिकॉर्ड बने कई धराशाही हुए इन सबके बीच पंजाब किंग्स इलेवन में एक चहरा कुछ करके जाने को बेताब दिखाई दे रहा था वो था पॉल बेल्थाती जिसने कुछ ही मैच के अनुभव को अपनी ताकत में तब्दील करके वो कर दिखाया जो हर क्रिकेटर करना चाहते है लेकिन किस्मत हर किसी के साथ नही होती! उनके आने के साथ ही छक्कों की बारिश भी जैसे आ गई थी! चेन्नई के खिलाफ 60 गेंदों में 120 रनों की आक्रामक और धेर्य से खेली गई उनकी पारी जिसमे 19 चौके व 2 छक्के शामिल थे! उनकी इस पारी से पंजाब किंग्स इलेवन के कॅप्टन एडम गिलक्रिस्ट उनके फेन हो गए! पंजाब की सह मालकिन प्रीटी जिन्टा को भी लगने लगा की बेल्थाती उनकी टीम को इस बार आई पी एल का खिताब जरूर दिलाएगा! अपनी आक्रामक स्ट्रोक व धेर्य की बदोलत उनका नाम ओरंज केप की दौड़ में शामिल था लेकिन अंत में जाकर पिछड़ जाने की वजह से वो ओरंज केप को अपना नही बना सके! क्रिकेट के भगवान भी उनकी प्रसंसा करने से नही चुके! सचिन का कहना था की बेल्थाती जैसे खिलाड़ियों के लिए ही आई पी एल बना है जितना खेल सकते हो खेलों और अपने खेल से पूरी दुनिया को अपना दीवाना बना लो! आई पी एल के ख़त्म होते ही बेल्थाती भी कही गुम न हो जाये इसलिए कई खिलाड़ियों ने वेस्टइंडीस दौरे के लिए उनके नाम का सुझाव बीसीसीआई को भेजा लेकिन उनका टीम में ना चुना जाना उनके अनुभव का बीच में आना रहा है!


आईपीएल की रंगीन राते- आई पी एल में चौके छक्कों की बरसात के साथ कई खुलासों का भी जन्म हुआ! इन खुलासों में सबसे बड़ा खुलासा चीयरलीडर के साथ अभद्रता व बदसलूकी का था! साउथ अफ्रीका की एक
चीयरलीडर
गेबरियेला पास्कोलेटाने अपने ब्लॉग में कुछ क्रिकेटर के बारे में लिखा की मैच ख़त्म होने के बाद चीयरअप पार्टीज के दौरान क्रिकेटर सबसे ज्यादा अभद्र हरकतों को जन्म देते है! इस सनसनीखेज खुलासे के बाद गेबरियेला को आई पी एल से बाहर का रास्ता दिखा दिया है! गेबरियेला का कहना था की मैंने जो अनुभव किया वही मैंने अपने ब्लॉग में लिखा लेकिन अब मैं कानूनी कार्यवाही करने पर विचार कर रही हूँ! गेबरियेला का कहना था की मैंने कभी नही सोचा था की भद्र जनों का खेल समझा जाने वाअला एक खेल इतना अभद्र होगा! पस्कोलेटा ने अभद्र क्रिकेटरों के बारे में बताते हुए कहा की मैच के बाद विशेष पार्टी का आयोजन होता था और रात में तो इन्तहा ही हो जाती थी, ड्रिंक बहती, म्यूजिक चलता, और वीआईपी कमरों में क्या चल रहा है ये तो बताने लायक ही नही है! विदेशी खिलाड़ियों को सबसे ज्यादा अभद्र बताते हुए साउथ अफ्रीका के कैप्टन ग्रीम स्मिथ को सबसे अभद्र व बेहूदा बताया! ये सनसनीखेज खुलासा आई पी एल की रंगीन रातों और क्रिकेटरों के काले सच को सामने रखता है ! इस तरह के खुलासे क्रिकेट और प्रसंसकों की दूरियाँ तय करते है!


Saturday, June 4, 2011

क्या हम फिर से मिलने आयेंगे क्या हम फिर प्यार का का घर बनायेंगे
ये वक़्त साथ देगा सोचता हूँ एक पल सोचता हूँ फिर टहर जाता हूँ
लेकिन क्या कहू क्या करू कुछ समझ नही आता क्या करू अब तो
कुछ हम पर भी अहसान करो अब मेरी गलती माफ़ करो
मेरा ऐसा अपना पण ले डूबा मुझे माफ़ कर k

Wednesday, May 25, 2011

एयर इंडिया की साईं पर शाही जीत

ऐशबाग स्टेडियम पर 65 वें ओबेदुल्लाह गोल्ड हॉकी टूर्नामेंट के अंतर्गत कल खेले गए पूल अ के मैच में अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों से सुसज्जित एयर इंडिया ने साईं को ४-३ से हराकर लम्बी उड़ान भरी! अजलान शाह हॉकी टूर्नामेंट में भारतीय हॉकी टीम का नेतृत्व करने वाले स्टार फॉरवर्ड खिलाड़ी अर्जुन हलप्पा, शिवेंद्र सिंह, समीर दाद, की मोजुदगी में एयर इंडिया ने सेकिंड हाल्फ तक आक्रामक खेल दिखाते हुए धनराज पिलाई, समीर दाद, के गोलों कि मदद से स्कोर को ३-१ तक पहुचा दिया था साईं का खेल दुसरे हाल्फ के अंत तक सामान्य रहा लेकिन अंतिम १० मिनट में किये तीन गोलों ने उनको बरावरी पर पहुचा दिया था लेकिन खेल के अंतिम समय में मिले पनाल्टी कार्नर के सहारे एयर इंडिया जीत के पायदान पर चढ़ गया! साईं के अर्राफ उर्रहमान को उनके अच्छे प्रदर्शन के लिए" प्लयेर ऑफ़ दी मैच' दिया गया"

Tuesday, March 8, 2011

देश के ह्रदय ने रचा कीर्तिमान

रांची में आयोजित ३४वें राष्ट्रीय खेलों में मध्यप्रदेश ने लगाया पदकों का शतक, अब तक का श्रेष्ठ प्रदर्शन कर जीते १०३ पदक

सुख का दाता, सब का साथी, अपना मध्य प्रदेश है...गीत की ये पंक्तिया देश के ह्रदय यानी मध्य प्रदेश में वर्तमान समय में हर तरफ गुंजायमान है! ये पंक्तिया प्रदेश के गौरव गाथा का बखान बड़े ही अनुपम ढंग से कर लगातार युवाओ को प्रेरित कर रही है! गीत की पंक्तियों का असर अभी हाल ही रांची में आयोजित राष्ट्रीय खेलों में भी देखने को मिला जहा ये पंक्तियाँ प्रदेश के खिलाड़ियों को लगातार जीत के लिए प्रेरित करती दिखाई दे रही थी और प्रदेश के रणबांकुरे कीर्तिमान पे कीर्तिमान गढ़ते जा रहे थे! झारखण्ड की राजधानी रांची में हुए ३४वें राष्ट्रीय खेलों में देश के ह्रदय ने अब तक हुए राष्ट्रीय खेलों का सर्वश्रेष्ट प्रदर्शन कर पदकों का शतक लगाया! राष्ट्रीय खेलों में हमने २५ स्वर्ण, ३२ रजत और ४६ कांस्य सहित १०३ पदक जीतकर नया कीर्तिमान गढ़ा! यह हमारा इन खेलों के दौरान अब तक का श्रेष्ठ प्रदर्शन था इससे पहले २००७ में गुवाहाटी में आयोजित ३३वें राष्ट्रीय खेलों में प्रदेश के खिलाड़ियों ने १२ स्वर्ण, १९रजत और १९ कांस्य सहित ६३ पदक जीतकर पदक तालिका में १२वां स्थान प्राप्त किया! लेकिन इस बार देश के दिल ने खेलों में नई इबारत गढ़कर पदक तालिका में सीधे ४ स्थानों की छलांग के साथ ८वां पायदान हासिल किया! झीलों के शहर में लगातार अभ्यासरत केनोइंग व क्याइंग के खिलाड़ियों ने सबसे ज्यादा पदक जीतकर भोपाल की बड़ी झील को गौरवान्वित करने का मौका प्रदान किया! प्रदेश के स्टार तैराक संदीप सेजवाल ने ३ स्वर्ण, १ रजत और १ कांस्य के साथ पांच पदक जीतकर सबसे ज्यादा पदक अपनी झोली में डाले! संदीप सेजवाल ने पानी से सोना निकाल कर प्रदेश की धरा को स्वर्णिम कर दिया! खेलों के दौरान तैराकी स्पर्धा में प्रदेश के नाम एक नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी देखने को मिला जब संदीप सेजवाल ने ५०मीटर ब्रेस्ट स्ट्रोक तैराकी स्पर्धा २९:०३ सेकंड में पूरी की! पानी में गढ़ा गया यह रिकॉर्ड भावी खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनने का काम करेगा! प्रदेश के खिलाड़ियों ने कुश्ती, बुशु, कराटे, ताइक्वान्दो, शूटिंग, बोक्सिंग में भी अपनी प्रतिभा दिखा सफलता के झंडे गाढ़ दिए! राष्ट्रीय खेलों का ताज भले ही सेना को चला गया लेकिन देश का ह्रदय अपने खिलाड़ियों के द्वारा रची गई ऐतिहासिक विजय गाथा से गदगद नजर आ रहा है! जिस प्रदेश में खेलों को संवारने के लिए अथक प्रयास किये जा रहे है उस प्रदेश की अपने खिलाड़ियों से यही उम्मीद है की वे अपना और अपने प्रदेश का लगातार डंका बजाते रहे! अंत में मध्य प्रदेश गीत की पंक्तियों का अंत प्रदेश और उसके रणबांकुरों को समर्पित है जो कुछ इस तरह है...हॉकी की नर्सरी,जलक्रीड़ाये, खेल यहाँ अनेक है, देश का ह्रदय हर खेल में खिलाडियों से लवरेज है!
यही धरा है जिस पर जड़ा दोहरा शतक सचिन ने, यही धरा है जहा से निकले समीर और शिवेंद्र है!
सुख का दाता, सब का साथी, शुभ का ये संकेत है, माँ की गोद,पिता का आश्रय अपना मध्य प्रदेश है!

Sunday, March 6, 2011

उम्दा बल्लेबाजी, गुमशुदा गेंदबाजी

२८ साल बाद विश्व कप जीतने का सपना संजोए बैठी टीम इंडिया ने उपमहाद्वीप में खेले जा रहे विश्व कप के दशवे संस्करण के शुरूआती मुकाबले में कमजोर बांग्लादेश को ८७ रन से हराकर २००७ में मिली हार का हिसाब चुकता किया! वही इंग्लिश टीम के खिलाफ खेला गया दूसरा मैच रोमांच के चरम पर पहुँच कर टाई हो गया! टीम इंडिया के दोनों मैचों का विश्लेषण करने पर ये साफ़ जाहिर हो गया की जहा हमारे बल्लेबाज उम्दा प्रदर्शन कर रहे है वही हमारे गेंदबाज विश्व कप में अब तक छाप छोड़ने में नाकामयाब साबित हुए है!


छाया "वी" फेक्टर का दबंग- बांग्लादेश से चार साल पहले मिली हार का जख्म शायद अब तक भरा नही था जिसने पहले दौर की बाधा पार करने से पहले ही टीम इंडिया को घर वापस भेज दिया! उन्ही जख्मो को भरने का ये सुनहरा मौका था जिसमे टीम इंडिया ने फतह हासिल की! दशवे संस्करण की शुरूआती जंग का गवाह बना मीरपुर का शेरे बांगला स्टेडियम! जहा धोनी के धुरंधरों ने ८७ रन से जीत हासिल कर चार साल पुरानी हार को पीछे छोड़ जीत के अभियान को आगे बढाया! बांग्लादेश के खिलाफ खेले गए मैच में"वी " फेक्टर यानी वीरेंदर सहवाग और विराट कोहली का दबंग हर तरफ छाया रहा! "वी" फेक्टर ने अपनी पारी के दौरान आक्रामकता, धेर्य, कलात्मकता और कौशल का परिचय देते हुए तीसरे विकेट के लिए २०३ रनों की अद्दभुत पारी खेल कमजोर मानी जा रही बंगलादेश के सामने ३७१ रनों का पहाड़ खड़ा कर दिया! जिसमे वी फॉर वीरेंदर सहवाग ने १७५ रनों की मेराथन पारी खेल न केवल भारत को जीत दिलाई बल्कि १९८३ के विश्व कप के हीरो कपिल देव के जिम्बाम्बे के खिलाफ बनाये १७५ रनों की बराबरी की! उनकी इस रिकॉर्ड तोड़ पारी में दूसरे छोर पर साथ दिया विराट कोहली ने! जिन्होंने अपने पहले ही विश्व कप में दर्शकों को शतकीय सलाम भेजा! लक्ष्य का पीछा करते हुए बांग्लादेश ने धेर्य और चार साल पहले मिली जीत का परिचय देते हुए ३७० रनों के जबाब में २८३ रन तक संघर्ष जारी रखकर अपने ऊपर से कमजोर टीम का तमगा हटाने का काम किया! इस संघर्ष में बांग्लादेशी बल्लेबाजी की रीढ़ कहे जाने वाले तमीम इकबाल ने शुरूआती समय में टीम इंडिया के गेंदबाजों की मरमम धुनाई करते हुए ७० रन ठोक डाले! बंगलादेशी कप्तान ने चतुराई भरी पारी खेलते हुए ५५ रनों का योगदान दिया लेकिन वो अपनी टीम की नैया पार लगाने में कारगर साबित नही हुए! पहले दस ओवर में तमीम इकबाल ने श्रीसंथ को लगातार अपने निशाने रखकर उन्हें गेंदबाजी की दिशा से भटका दिया! उनकी बेअसर गेंदबाजी ने उन्हें ५ ओवर में ५३ रन देने पर मजबूर कर दिया! टीम इंडिया की बल्लेबाजी में जहा लगातार सुधार देखने को मिल रहा है! वर्तमान में टीम इंडिया का टॉप बेटिंग आर्डर अन्य टीमों की तुलना में सर्वश्रेष्ठ नजर आ रहा है! वही दूसरी तरफ हमारा गेंदबाजी आक्रमण अपनी धार पूरी तरह खो चूका है!गेंदबाजी की बात करे तो एक भी गेंदबाज ऐसा नही दिख रहा जो अपने दम पर टीम इंडिया को जीत दिला सके! मिनाफ़ पटेल को छोड़ कर सभी गेंदबाज लय से भटकते नजर आ रहे है! जहीर खान जैसे गेंदबाज भी अपने आप को साबित करने में विफल रहे है जबकि श्रीसंथ सबसे ज्यादा दिशाहीन और बेअसर! टीम इंडिया विश्व कप जीतने का सपना लिए विश्व कप रुपी दंगल में ताल तो ठोकता नजर आ रहा है लेकिन गुमशुदा गेंदबाजों के दम पर हमारी ताल खोखली नजर आ रही है!

रोमांचक मैच, नतीजा टाई-बंगलादेश के खिलाफ मिली जीत से उत्साहित टीम इंडिया इंग्लॅण्ड के खिलाफ बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेले गए मैच में जीत का बचाब नही कर पाई लेकिन हार को भी गले नही लगाया! रोमांच से परिपूर्ण मैच में बाजी किसी के हाथ न लग कर टाई की स्थिथि बन गई!साँसे रोक देने वाले इस मैच ने फिर से क्रिकेट को जीत दिला दी! विश्व कप के दुसरे ग्रुप मैच में इंग्लॅण्ड के खिलाफ पहले बल्लेबाजी करने उतरी टीम इंडिया ने क्रिकेट के भगवान् कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर के एकदिवसीय मैचों में ४७वें शतक के सहारे ३३८ रनों का विशाल स्कोर खड़ा कर दिया! जिसमे युवी के तेजतर्रार ५८ रन भी शामिल थे! टीम इंडिया ने इसी के साथ लगातार दूसरी बार तीन सो का स्कोर बनाया! विशाल स्कोर का पीछा करने उतरी इंग्लिश टीम ने कप्तान स्ट्रास व पीटरसन के नेतृत्व में अच्छी शुरुआत करते हुए ९ ओवर में ६८ रन ठोक डाले!२२ गेंदों पर ३१ रन की तेजतर्रार पारी खेलने वाले पीटरसन को मुनाफ पटेल ने अपनी ही गेंद पर कैच आउट किया! पीटरसन के पेवेलियन लौट जाने के बाद ट्राट भी ज्यादा देर नही टिक सके! लेकिन इयान बेल के क्रीज पर आते ही मैच रोमांच के आगोश में समां गया! स्ट्रास व बेल ने भारतीय गेंदबाजी आक्रमण की धज्जिया उड़ाते हुए तीसरे विकेट के लिए १७० रन जोड़े! ४२वें ओवर तक इंग्लिश टीम का स्कोर २८० रन तक पहुँच चूका था एक समय ऐसा लग रहा था की ये जोड़ी आसानी से मैच को टीम इंडिया के हाथों से छीन लेगी! मैच पूरी तरह शिकंजे से निकल चूका था लेकिन तभी भारतीय गुमशुदा गेंदबाजी के तरकश से जहीर नामक तीर ने मैच के अगले ही ओवर में लगातार दो गेंदों पर स्ट्रौस व बेल को का विकेट लेकर भारत को फिर मैच में ला खड़ा किया! जहीर ने अगले ही ओवर में कोलिगवुड का विकेट भी निकाल कर मैच पर टीम इंडिया का दबदबा बना दिया! मैच में कई बार पासा पलता! कभी गेंद इंग्लिश टीम के पाले में नजर आ रही थी तो कभी टीम इंडिया के! लेकिन अंतिम २ ओवर पूरी तरह रोमांच का हिस्सा बने! यह मैच का ऐसा मोड़ था जब हर कोई प्रसंसक अपनी टीम के लिए दुआ मांग रहा था! अंतिम २ ओवर में इंग्लिश टीम को जीत के लिए २९ रनों की दरकार थी! इस समय ऐसा लग रहा थी की टीम इंडिया ये जंग जीत लेगी! लेकिन पियूष चावला के द्वारा फेंका गया ४९वां ओवर बेहद खर्चीला साबित हुआ! ब्रेसनन व स्वान ने इस ओवर में दो छक्के जड़कर १५ रन बटोर कर १ ओवर में १४ रन का फांसला रख दिया! अंतिम ओवर में रोमांच चरम सीमा को छू गया! अंतिम ओवर की अंतिम गेंद पर २ रन इंग्लिश टीम को बनाने थे लेकिन इस गेंद पर एक रन ही आ सका और इस तरह साँसे रोक देने वाला यह मैच टाई पर आकर समाप्त हो गया! दोनों टीमों के द्वारा किये गए श्रेष्ठ प्रदर्शन ने क्रिकेट की जीत पर मोहर लगा प्रसंसको को विश्व कप का अब तक का सबसे रोमांचक मुकाबले का तोहफा प्रदान किया! अब तक खेले गए विश्व कप में चार मैचों के दौरान ऐसा हुआ है जब जीत किसी भी टीम को न मिल कर टाई की स्थिथि बनी है!टाई के रूप में समाप्त हुए इस मैच ने एक बार फिर भारतीय गेंदबाजी की पोल खोल दी है! गेंदबाजी पर फिर से सवालिया निशान खड़े हो गए है की आखिर कब तक हम सिर्फ और सिर्फ बल्लेबाजों के दम पर ही जीत हासिल करते रहेंगे! क्या हमारी गेंदबाजी अभी भी गुमशुदा है ?

भगवान् के कदम "महाशतक" की ओर- क्रिकेट के भगवान, मास्टर ब्लास्टर ऐसे न जाने कितने उपनाम है जो क्रिकेट जगत और प्रसंसकों ने सचिन तेंदुलकर को उपहार स्वरुप भेंट किये है! इसके बदले सचिन ने भी उन्हें नए रिकॉर्ड के माध्यम से "रिटर्न गिफ्ट" हर मौके पर दिया है! रेकॉर्डो की इसी फेहरिस्त में उनके नाम एक और रिकॉर्ड दर्ज हो गया है विश्व कप में सर्वाधिक शतक लगाने का! टेस्ट और एकदिवसीय क्रिकेट में सर्वाधिक शतक जड़ने वाले सचिन ने विश्व कप के दशवें संस्करण में इंग्लिश टीम के खिलाफ १२० रन की लाजबाब पारी खेलकर विश्व कप में पांचवा शतक लगाया! विश्व कप में इससे पहले हमवतन सौरव गांगुली, ऑस्ट्रलियाई रिकी पोंटिंग और मार्क वा चार- चार शतक जड़ चुके है! क्रिकेट के भगवान से अब अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में एक नए रिकॉर्ड" शतकों के महाशतक की उम्मीद प्रसंसक लगाये बैठे है जिसे संभवत वह इसी महाकुम्भ में पूरा करेंगे! फिलहाल उनके नाम टेस्ट में ५१ और वनडे में ४७ शतक के साथ ९८ शतक है!

Wednesday, February 23, 2011

चार दावेदारों के बीच की प्रतिस्पर्धा

एशिया महाद्वीप में खेले जा रहे १०वें क्रिकेट संग्राम में प्रतिस्पर्धा केवल चार टीमों के बीच ही दिखाई दे रही है! इन सब के बीच ही असली जंग होने को है! जिसका आधार एक नया रोमांच लेकर आएगा! इस रोमांच में एक नै लहर देखने को मिलेगी! यही लहर पूरे महाद्वीप ही नही बल्कि पूरे विश्व में लगातार अपनी जड़े हम बी कोशिश हम कहना जय लेकिन लेकिन हमारा लेकिन kuch हमारा कुछ कहना है लेकिन हम फिर भी कुछ कहना है! फिर भी हम कुछ कर सके फिर भी ऐसा मुमकिन नही है! दावेदारों के बीच की इस जुंग में करीब अहसास आ गया है लेकिन किस्मत जीत का पैगाम लेके का कुछ भी है लेकिन कुछ भी है हम पर ऐसा क्या कहना है है हम पर जो अह्स्सा के काबिल फिर भी हम पर दबाब रहेगा तब तक यहाँ कुछ भी नही है अब लें लेकिन क्या काया कुह भी है लेकिन हम पर भी लेकिन हमर फिर भी हम ऐसा यकीन है कुछ समय के बाद हमारा इंतकाम यजीन में जाना c

Tuesday, October 12, 2010

कॉमनवेल्थ में छाई स्वर्णिम शतकीय दबंगाई


दिल्ली में चल रहा कॉमनवेल्थ फीवर रंगारंग समापन के साथ ख़त्म हुआ! २०१४ में होने वाले कॉमनवेल्थ के लिए ग्लासगो (स्कॉट्लैंड ) के प्रतिनिधियों को ध्वज प्रदान करके औपचारिक पूर्ति की गई! खेलों के इस अर्द्ध कुम्भ ने भारतीय खेल पटल पर एक नया अध्याय सकुशल पूरा किया! १९८२ में दिल्ली में हुए एशियाड के बाद २८ साल के बाद यह हमारे देश में खेलों का अब तक का सबसे बड़ा आयोजन था! कॉमनवेल्थ खेलों में हो रहे भ्रस्टाचार की परत खुल जाने से यह मुद्दा ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटिश मीडिया में लगातार छाया रहा! खेलों के दौरान अर्थात खेलों से पहले कलमाड़ी का भ्रस्टाचार में दबंग और खेलों के अंत तक हमारे देश के खिलाड़ी अपने सुनहरे पदकों का दबंग दिखाते नजर आ रहे है! हमारे देश के लिए यह पहला मौका था जब हम विश्व के ७१ देशों के ८००० से अधिक खिलाड़ियों के इस अर्द्ध कुम्भ का आयोजन करने में जुटे थे! खिलाड़ियों के टहरने के लिए खेल गाँव को दुल्हन की तरह सजाया गया लेकिन फिर भी खेल शुरू होने से पहले हम खेलगांव की आलोचनाओं के शिकार हुए! ब्रिटिश मीडिया ने तो इसे खेलों का सबसे नकारात्मक पहलु बताया जबकि ब्रिटिश मीडिया या अन्य देशों का मीडिया यह भूल गया की वर्ष २००२ में मेनचेस्टर कॉमनवेल्थ में हमारे देश की कई खेलों की टीमो को खेलगांव के दर्शन तक नही हुए! खैर यह खेलों की आलोचनात्मक दास्ताँ थी जो वक़्त के साथ गुजर चुकी है! दिल्ली कॉमनवेल्थ में हमे वो सब कुछ मिला जिसके लिए हम अब तक सोच रहे थे!इन खेलों में हमने ३८ स्वर्ण सहित १०१ पदक हासिल करके पदकों का शतक लगाया! २००६ मेलबोर्न में हुए कॉमनवेल्थ में हम चोथे स्थान पर थे लेकिन यहाँ हमने दूसरा स्थान पाया! यह पहला मौका था जब हमने पदकों का शतक लगाकर मेनचेस्टर कॉमनवेल्थ में जीते ६९ पदकों का रिकॉर्ड तोडा!भारोत्तोलक सोनिया चानू ने रजत पदक जीतकर अभियान की शुरुआत पहले दिन ही कर दी थी अब इस अभियान में सुनहरी चमक बिखरने का समय था जिसे पूरा किया ओलंपिक स्वर्ण विजेता अभिनव बिंद्रा और गगन नारंग की स्टार जोड़ी ने! जिन्होंने २५ मीटर युगल निशानेबाजी में भारत को पहला सोना दिला सुनहरी सफलता का अहसास कराया! बिंद्रा- नारंग के द्वारा जीते सोने की सुनहरी महक ने भारत के रणबांकुरों में सोना पाने की लालसा को दुगना कर दिया जिससे भारत कॉमनवेल्थ खेलों में अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रहा! १९वें कॉमनवेल्थ खेलों में जहा हमारे देश के रणबांकुरों ने कई खेलों में रिकॉर्ड कायम किये वही कई खेलों ने हमें आशा के अनुरूप परिणाम नही दिए! डिस्कस थ्रोअर कृष्णा पुनिया ने ट्रेक एवं फिल्ड एथलीट प्रतिस्पर्धा में जहा हमे ५२ साल बाद स्वर्ण दिलाया वही बीजिंग ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता विजेंद्र से स्वर्ण की आस लगाये प्रसंसकों को उस समय निरासा मिली जब वो इन उम्मीदों पर खरा नही उतरे और मुकाबले से बाहर हो गए! क्रिकेट की लोकप्रियता के साए में जी रहे भारतीय दर्शकों को इन खेलों ने अपने साए में भरने की कोशिश तो भरपूर की लेकिन फिर भी कुश्ती, निशानेबाजी, बोक्सिंग, हॉकी को छोड़ कर अधिकतर खेल दर्शकों के लिए तरसते रहे! १९वें कॉमनवेल्थ खेलों में कुलमिलाकर ७५ रिकॉर्ड नए बने जिनमे कुछ रिकॉर्ड भारतीय खिलाडियों के हिस्से में भी आये! तीरंदाजी में झारखंड के एक ऑटो चालक की लाडली बेटी ने व्यक्तिगत व टीम स्पर्धा में दोहरी स्वर्णिम कामयाबी हासिल की! १७ साल की दीपिका ने इतनी छोटी उम्र में स्वर्णिम निशाना लगा कर कॉमनवेल्थ खेलों में तीरंदाजी का स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला होने का गौरव हासिल किया! उनकी इस स्वर्णिम दास्ताँ ने उन्हें एक ही दिन में तीरंदाजी का नया स्टार बना दिया! कॉमनवेल्थ खेलों में हॉकी की चमक एक बार फिर देखने को मिली जब राजपाल सिंह के नेतृत्व में टीम इंडिया ने पाक को ७-४ से हराकर बाहर का रास्ता दिखाया! चक दे इंडिया की गूंज अब हर तरफ गूंजने लगी थी ऐसा लग रहा था मानो टीम इंडिया के स्वर्णिम दिन फिर लौट आये है! टीम इंडिया को सेमी फ़ाइनल का टिकट कटाने के लिए बस एक और जीत की दरकार थी लेकिन इस बार मुकाबला अंग्रेजों से होने वाला था मैच के शुरू होने से लेकर अंत तक दोनों ही टीमों के खिलाड़ी एक दुसरे पर हावी रहे नतीजा मैच पर टिका और इस समय अंतिम गोल करने का दारोमदार टीम इंडिया के फॉरवर्ड खिलाड़ी शिवेंद्र सिंह पर था लेकिन शिवेंद्र ने भरोसे को हकीकत में तब्दील करके अपनी स्टिक से अंतिम समय में गोल करके फ़ाइनल में टीम इंडिया को प्रवेश कराया लेकिन जो चमक टीम इंडिया की हॉकी में अब तक नजर आ रही थी मानो ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ फ़ाइनल में वो चमक कही खो सी गई थी नतीजा हमे ८-० से अब तक की सबसे बड़ी हार झेलनी पड़ी!खैर गुमनामी के साए में डूब रहा हमारा राष्ट्रीय खेल कुछ चमक छोड़ने में तो कामयाब रहा ही साथ ही साथ हमे कॉमनवेल्थ में पहला पदक भी मिला! इन खेलों ने भारतीय नारी सब पर भारी जुमले को भी सच्चाई प्रदान की! महिलाओं ने अपनी शक्ति का परचम दिखाते हुए १०१ पदकों में से ३६ पदकों पर अपना दाव लगाया! खेलों के अंत तक एक खुली चुनोती भी देखने को मिली जब ऑस्ट्रेलिया की डिस्कस थ्रोअर में विश्व चैम्पियन रह चुकी डैनी सेमुअल्स ने कॉमनवेल्थ स्वर्ण पदक विजेता कृष्णा पुनिया को ये कहकर अपनी प्रतिक्रिया जताई की कृष्णा पुनिया ने मेरी अनुपस्थिति में स्वर्ण जीता है यदि मैं इन खेलों में प्रतियोगी होती तो मुकाबला टक्कर का होता! विश्व चैम्पियन ने कृष्णा को इस सम्बन्ध में ये कहकर पल्ला झाड दिया की मैं किसी कारणवश इन खेलों में नही आ सकी लेकिन हमारे पास अभी मौका है, कृष्णा अगर मेरी चुनोती को स्वीकार करती है तो ये मुकावला फिर हो सकता है! खैर कृष्णा इस चुनोती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है और संभवत ये मुकावला फरवरी में हो सकता है! डैनी सेमुअल्स और कृष्णा पहले भी कई बार आमने सामने हो चुकी है जिसमे कृष्णा ने विश्व चैम्पियन को एक बार हराया भी है! कॉमनवेल्थ में मिली इन उपलब्धियों ने एशियाड के लिए स्वर्णिम भविष्य की उम्मीद बरक़रार रखी है! एशियाड में सफलता का डंका बजेगा या नही ये तो एशियाड में ही पता चल पायेगा!






Tuesday, October 5, 2010

वैरी वैरी स्पेशल ने फिर खेली स्पेशल पारी

मोहाली की पिच गेंदबाजों के पक्ष में दिखाई दे रही थी! मैच के तीसरे दिन जहा एक ओर ऑस्ट्रेलिया का दबदबा बन ही रहा था की इशांत की गेंदबाजी की तेज धार कंगारुओं को काटती चली गई ! पहली पारी में २३ रनों की बढ़त लेकर कंगारुओं ने मैच में बापसी करने की कोशिश जरूर की लेकिन दूसरी पारी में वें भारतीय गेंदबाजो के जवाबी आक्रमण के फेर में फ़स गए और १९२ रनों पर ही चलते बने! २१६ रनों का लक्ष्य भारतीय बल्लेबाजों के लिए कठिन नही दिख रहा था जिस तरह भारतीय बल्लेबाजों की बल्लेबाजी का खौफ कंगारुओं के भूतकाल में दिख

Tuesday, September 28, 2010

महिला मुक्केबाजी की सुपरमॉम- मेरी कोम

महिला मुक्केबाजी में एक नही, दो नही, पांच-पांच स्वर्ण पदक जीतना एक महिला खिलाड़ी को उसके खेल के प्रति समर्पित होने का परिणाम दर्शाता है! एम सी मेरी कोम मुक्केबाजी की इस कठिन प्रतिस्पर्धा में अपने आप को पूरी तरह सहज रखती है! जुड़वां बच्चो की माँ मेरी कोम ने विश्व महिला मुक्केबाजी में लगातार पांचवां स्वर्ण पदक जीतकर जाहिर कर दिया की महिला अपने बच्चो का पालन ही नही करती है, बल्कि अपने देश का प्रतिनिधित्व करने में भी सक्षम है! मेरी कोम का शुरूआती सफ़र ही उनकी सफलताओं का आगाज था मणिपुर के एक छोटे से गाँव की ये लड़की जब पहली बार मुक्केबाजी देखने पहुची तो वहा मुक्केबाजी कर रहे कुछ लडको ने मेरी से कहा की ये बच्चो के खेलने का खेल नही है एक पंच तुम्हारी नाक पर पड़ गया तो नाक टूट जायेगी! मेरी ने उसी समय पर सोच लिया की m

Friday, September 10, 2010

फिर छाया फिक्सिंग का साया

पाक के गलियारे एक बार फिर फिक्सिंग की बीमारी का दंश झेलने को मजबूर हो गए है, आखिर ये बीमारी तीन नापाक क्रिकेटर्स की अपने देश को सौगात थी! मुहम्मद आसिफ,सलमान बट, मोहम्मद आमिर के द्वारा रची गयी फिक्सिंग की साजिश ने इंग्लॅण्ड के खिलाफ चौथे टेस्ट मैच में फिक्सिंग के नए रूप को जन्म दिया! क्रिकेट का मक्का कहे जाने वाले लोर्ड्स के मैदान पर इस साजिश को अंजाम देकर नापाक क्रिकेटर्स ने बदनामी का दाग यहाँ पर भी छोड़ दिया!

Tuesday, August 17, 2010

जारी रहेगा सह्बागी समर

दाम्बुला में चल रही त्रिकोणीय श्रंखला में भारत के दिग्गज बल्लेबाज जहा पहले मैच में ताश के पत्तो की तरह बिखर गए वही अगले ही मैच में श्रीलंका के खिलाफ सह्बाग ने ९९ रन बनाकर भारत को आसान जीत का हकदार बना दिया!कीवियो के खिलाफ भारत ने ३ विकेट शुरू में निकल कर मैच में पकड़ बना ली थी लेकिन किवी कप्तान टेलर और स्कॉट styr

Monday, May 31, 2010

हम भी है जोश में

जिम्बाम्बे की कमजोर टीम से हारने वाली युवा टीम इंडिया ने अपने अगले मैच में श्रीलंका जैसी मजबूत टीम को हराकर यह साबित कर दिया है की सुरेश रैना की ये युवा बिग्रेड किसी से कम नहीं है! श्रीलंका के खिलाफ अपना अगला मैच खेलने उतरी टीम इंडिया के युवा खिलाडियों ने २४३ रनों का लक्ष्य तीन विकेट खोकर ही प्राप्त कर लिया! रोहित शर्मा ने इस मैच में अपने एकदिवसीय करियर का दूसरा शतक १०१ बनाते हुए भारत को आसान जीत के करीब पहुचाया साथ ही साथ विराट कोहली की ८२ रनों की पारी भी श्रीलंका पर भारी पड़ी!सुरेश रैना की युवा बिग्रेड के सामने श्रीलंका हर समय संघर्ष करता नजर आया!इस जीत के साथ ही यह भी तय हो गया है की टीम इंडिया की यह युवा टीम हर टीम को हराने में सक्षम नजर आ रही है, आखिर युवाओं ने अपना जोश दिखा ही दिया!

Saturday, May 29, 2010

एक और हार

जिम्बाम्बे में खेली जा रही तीन देशो की एकदिवसीय श्रृंखला में भारत को एक बार फिर हार का सामना करना पड़ा! सुरेश रैना के नेतृत्व में टीम इंडिया की युवा बिग्रेड जिम्बाम्बे की नोसिखिया टीम से क्रिकेट के हर क्षेत्र में पीछे नजर आई! युवा बिग्रेड ने हालांकि २८५ रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया लेकिन जिम्बाम्बे के विकेटकीपर बल्लेबाज ब्रेंडन टेलर की ८१ रनों की पारी और अपना पहला एकदिवसीय मैच खेल रहे क्रेग इरविन के द्वारा बनाये गए ६१ की बदोलत जिम्बाम्बे ने यह मैच दस गेंद शेष रहते जीत लिया! जिम्बाम्बे ने इस मैच में जीत हासिल करते हुए भारत के खिलाफ ५०वे एकदिवसीय मैच में ९वी जीत आठ साल के लम्बे अंतराल के बाद हासिल की,उसने भारत के खिलाफ अंतिम मैच २००२ में जीता था इस हार ने टीम इंडिया की युवा बिग्रेड को ये सोचने पर मजबूर कर दिया है की ये तो शुरुआत है और आगे श्रीलंका जैसी आग है!

Thursday, May 13, 2010

शतरंज के मोहरों ने लिखी आनंद की दांस्ता

शतरंज की दुनिया में कई खिताब अपने नाम कर चुके विश्व चैम्पियन विश्वनाथन आनंद ने अपने नाम के अनुरूप खेल का प्रदर्शन करते हुए भारत को शतरंज का बादशाह बनाने में अहम् योगदान ही नहीं दिया है बल्कि वो शतरंज की हर कसोटी पर चेक पे चेक लगा कर विपक्षी को मात देते नजर आये है! ४ बार के विश्व विजेता आनंद सबसे कम उम्र के विश्व विजेता बनने गोरव भी हासिल कर चुके है, विश्व शतरंज प्रतियोगिता २०१० में बुल्गारिया के वेसलिन टोपालोव को हराकर विजेता बने आनंद शतरंज में आनंद की नई दास्ताँ लिखते हुए नजर आ रहे है!शतरंज के मोहरों के बीच आनंद बहुत ही गंभीर न होकर आनंद के साथ हर मुकाबले को अंजाम देते है उनके द्वारा बिछाई गई यह विसात हर खिलाड़ी को नजरअंदाज कर देती है लेकिन आनंद बस आनंद के साथ सब कुछ कर देते है, आखिर ये हमारे भारत के आनंद है!

बोक्सिंग का मिनी क्यूबा- भिवानी

बीजिंग ओलंपिक में मुक्केबाजी की दहशत की शुरुआत और विश्व मुक्केबाजी प्रतियोगिता में उस दहशत से सबको हैरान कर देने वाले विजेंद्र सिंह ने भिवानी को पूरी दुनिया में अपनी मुक्केबाजी की वजह से पहचान दिलाई है शायद यही वजह है की दुनिया अब भिवानी को मुक्केबाजी का मिनी क्यूबा के नाम से पुकार रही है! भिवानी के कालूबास गाँव के रहने वाले विजेंद्र सिंह मुक्केबाजी में भारत का नाम पूरी दुनिया में चमका रहे है, बीजिंग ओलंपिक में कांस्य पदक से शुरू हुआ उनका सफ़र विश्व मुक्केबाजी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक तक जा पहुंचा, जहां उन्होंने क्यूबा के मुक्केबाजों पर भारतीय मुक्केबाजी की छाप छोड़ दी थी! अपनी मुक्केबाजी से पूरी दुनिया को मदहोश कर देने वाले विजेंद्र ने मुक्केबाजी को नए आयाम देने का साहस किया वही मुक्केबाजी प्रसंसको ने उन्हें नया आदर्श मान लिया है, फिलहाल वो विश्व मुक्केबाजी में शीर्ष पर जमे हुए है! विजेंद्र जितने अपने मुक्कों के पंच के लिए जाने जाते है उतने ही आकर्षक वो शारीरिक रूप से भी है! लेक्मे इंडिया फैशन वीक में रेम्प पर भी वो सबको मदहोश कर चुके है, भिवानी की शान में विजेंद्र के साथ अब एक नाम और जुड़ गया है और वो है विश्व युवा जूनियर चैम्पियन -विकाश यादव! भिवानी के ही विकाश यादव बेडमिन्टन की दुनिया में अपने देश के नाम रोशन करना चाहते थे लेकिन किस्मत के खेल निराले है जो चाहा वो हो न सका! बेडमिन्टन की जगह अब मुक्कों ने ले ली थी
विकाश ने पुणे की स्पोर्ट्स अकादमी को अपने सपने को पूरा करने के लिए चुना और अपने पंच के लिए पहचाने जाने लगा! सफ़र की शुरुआत एशियाई युवा चैम्पियन बनने के साथ हुई! मुक्केबाजी का सफ़र अब उनका विकाश करने लगा और धीरे -धीरे वो मुक्केबाजी में पहचाने जाने लगे! उनके इस सफ़र को आगे बढाया कोच गणपति मनोहरन ने, जो उन्हें इसी वर्ष अजरबेजान की राजधानी बाकू में आयोजित विश्व युवा जूनियर मुक्केबाजी प्रतियोगिता में अपने साथ लेकर गए! विकाश ने प्रतियोगिता के शुरूआती मुकाबले आसानी से जीत कर बाकू में भारत का डंका बजा दिया था लेकिन उनकी सेमी-फाइनल की डगर कठिन साबित हुई यहाँ उनका सामना जर्मनी के थामस बाह्रेन्होल्ट से होने वाला था जो मुक्केबाजी में जर्मनी को कई खिताब दिला चुके थे लेकिन विकाश ने अपने कोच की आशा को हकीकत में बदल कर मुकाबला ८ -० के विशाल अंतर से जीत कर फाइनल में प्रवेश किया और फिर फाइनल भी जीत कर दुनिया के युवा मुक्केबाज बनने का गोरव हासिल किया यक़ीनन पहले विजेंद्र और अब विकश ने दुनिया में भारतीय मुक्केबाजी को नई पहचान दी है,अगर भिवानी ऐसे ही मुक्केबाजों को जन्म देता रहा तो शायद वह क्यूबा को भी पीछे छोड़ देगा और भारतीय मुक्केबाजी की गूंज सारी दुनिया में सुनाई देगी!



संजय शर्मा
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता
एवं जनसंचार विश्वविद्यालय,भोपाल

Tuesday, May 11, 2010

हॉकी का बढ़ता ग्राफ

मलेशिया के इपोह में खेले जा रहे अजलान शाह हॉकी टूर्नामेंट में भारत ने पाक, दक्षिण कोरिया और अब विश्व चैम्पियन ऑस्ट्रेलिया को मात देकर अंक तालिका में शीर्ष स्थान प्राप्त कर लिया है, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले गए मैच में तुषार खांडेकर, शिवेंद्र सिंह, अर्जुन हलप्पा के द्वारा किये गए ताबड़तोड़ गोलों की मदद से भारत एक समय ३-० से आगे नजर आ रहा था लेकिन विश्व चैम्पियन ने अच्छा खेल दिखाते हुए मैच में वापसी की कुछ उम्मीद जरूर लगाई लेकिन मैन ऑफ दी मैच तुषार खांडेकर के दो गोल मैच में चैम्पियन को चित करने में उपयोगी साबित हुए! भारत ने ऑस्ट्रेलिया को इस मैच में हराकर सात सालों से चला आ रहा जीत का अकाल भी दूर किया यक़ीनन यह भारतीय हॉकी का बढ़ता हुआ ग्राफ नजर आ रहा है

Monday, May 10, 2010

धोनी के बाद अब झूलन से आस

वेस्टइंडीज से हार के बाद सुपर-८ की दौड़ से बाहर हो चुकी धोनी की टीम हार के कारण को खोजने का प्रयास कर रही है, वही झूलन गोस्वामी की अगुवाई में महिला क्रिकेट टीम वेस्टइंडीज में चल रहे महिला विश्व कप में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही है!पहले मैच में न्यूज़ीलैण्ड से हार के बाद महिला टीम ने पाक को को हराकर विश्व कप में धमाका कर दिया है, इस मैच में पूनम राउत ओर मिताली राज के ऑलराउंड प्रदर्शन ने भारत को विश्व कप स्पर्धा के अगले दौर में पहुचाने में अहम् भूमिका निभाई है, महिलाओं के द्वारा किया जा रहा अच्छा प्रदर्शन धोनी बिग्रेड को नसीहत देता है की प्रदर्शन में निरंतरता लाओ, जीत की आस जगाओ

Saturday, May 8, 2010

क्रिकेट में हारे, हॉकी में बाजी मारे

२०-२० विश्व कप के सुपर-८ में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ताश के पत्तो की तरह बिखर कर भारत भले ही हार गया हो लेकिन रोहित शर्मा के द्वारा खेली गयी ७९ रनों की पारी इस मैच में भारत के जख्मो पर मरहम का काम कर गयी! यह पारी उन्होंने उस समय खेली जब भारत ४९ रनों पर ६ विकेट गवां चूका था क्रिकेट में मिली इस हार से खेल प्रेमी थोड़े मायूस जरूर हुए लेकिन हॉकी में मिली जीत शायद उनके लिए तोहफा बन गयी!मलेशिया में खेले जा रहे अजलान शाह टूर्नामेंट में भारत ने अपने चिर प्रतिद्वंदी पाक को ४-२ से हरा कर हॉकी की चमक को बरकरार रखते हुए अपने प्रदर्शन में निरंतरता लाने का प्रयास कुछ हद तक किया है! पाक के खिलाफ मिली इस जीत ने यक़ीनन यह कहने का प्रयास किया है की भारतीय हॉकी का स्वर्ण युग एक बार फिर लौट के आएगा और फिर वही धुन होगी-जय हो,जय हो

Tuesday, May 4, 2010

कठिन डगर धोनी फिर भी निडर

वेस्ट इंडीज में खेले जा रहे तीसरे २० -२० विश्व कप में भारत ने अफगानिस्तान और साउथ अफ्रीका को हराकर दुसरे दौर में प्रवेश भले ही कर लिया हो, लेकिन अगले दौर में उनका मुकाबला २००९ की विजेता पाकिस्तान और विश्व चैम्पियन आस्ट्रेलिया से होगा जहा भारत की जीत की राह आसान नहीं होगी! इस कठिन राह पर भी माह़ी के नाम से जाने वाले धोनी निडर लग रहे है, वजह है रैना की आतिशी बल्लेबाजी जिसके लिए वो जाने जाते है !साउथ अफ्रीका के खिलाफ ६० गेंदों में १०१ रन मारकर भारत को जीत दिलाने वाले रैना भारत के पहले और दुनिया के तीसरे २० -२० शतकधारी बन गए है इससे पहले इस कारनामे को वेस्ट इंडीज के क्रिस गेल, न्यूज़ीलैंड के मेकुल्लम अंजाम दे चुके है! क्रिकेट प्रेमी और टीम इंडिया को सुरेश रैना से बस एक ही आस है..बरसो रे रैना रैना ,बरसो रे रैना बरसो