Tuesday, September 28, 2010

महिला मुक्केबाजी की सुपरमॉम- मेरी कोम

महिला मुक्केबाजी में एक नही, दो नही, पांच-पांच स्वर्ण पदक जीतना एक महिला खिलाड़ी को उसके खेल के प्रति समर्पित होने का परिणाम दर्शाता है! एम सी मेरी कोम मुक्केबाजी की इस कठिन प्रतिस्पर्धा में अपने आप को पूरी तरह सहज रखती है! जुड़वां बच्चो की माँ मेरी कोम ने विश्व महिला मुक्केबाजी में लगातार पांचवां स्वर्ण पदक जीतकर जाहिर कर दिया की महिला अपने बच्चो का पालन ही नही करती है, बल्कि अपने देश का प्रतिनिधित्व करने में भी सक्षम है! मेरी कोम का शुरूआती सफ़र ही उनकी सफलताओं का आगाज था मणिपुर के एक छोटे से गाँव की ये लड़की जब पहली बार मुक्केबाजी देखने पहुची तो वहा मुक्केबाजी कर रहे कुछ लडको ने मेरी से कहा की ये बच्चो के खेलने का खेल नही है एक पंच तुम्हारी नाक पर पड़ गया तो नाक टूट जायेगी! मेरी ने उसी समय पर सोच लिया की m

Friday, September 10, 2010

फिर छाया फिक्सिंग का साया

पाक के गलियारे एक बार फिर फिक्सिंग की बीमारी का दंश झेलने को मजबूर हो गए है, आखिर ये बीमारी तीन नापाक क्रिकेटर्स की अपने देश को सौगात थी! मुहम्मद आसिफ,सलमान बट, मोहम्मद आमिर के द्वारा रची गयी फिक्सिंग की साजिश ने इंग्लॅण्ड के खिलाफ चौथे टेस्ट मैच में फिक्सिंग के नए रूप को जन्म दिया! क्रिकेट का मक्का कहे जाने वाले लोर्ड्स के मैदान पर इस साजिश को अंजाम देकर नापाक क्रिकेटर्स ने बदनामी का दाग यहाँ पर भी छोड़ दिया!

Tuesday, August 17, 2010

जारी रहेगा सह्बागी समर

दाम्बुला में चल रही त्रिकोणीय श्रंखला में भारत के दिग्गज बल्लेबाज जहा पहले मैच में ताश के पत्तो की तरह बिखर गए वही अगले ही मैच में श्रीलंका के खिलाफ सह्बाग ने ९९ रन बनाकर भारत को आसान जीत का हकदार बना दिया!कीवियो के खिलाफ भारत ने ३ विकेट शुरू में निकल कर मैच में पकड़ बना ली थी लेकिन किवी कप्तान टेलर और स्कॉट styr

Monday, May 31, 2010

हम भी है जोश में

जिम्बाम्बे की कमजोर टीम से हारने वाली युवा टीम इंडिया ने अपने अगले मैच में श्रीलंका जैसी मजबूत टीम को हराकर यह साबित कर दिया है की सुरेश रैना की ये युवा बिग्रेड किसी से कम नहीं है! श्रीलंका के खिलाफ अपना अगला मैच खेलने उतरी टीम इंडिया के युवा खिलाडियों ने २४३ रनों का लक्ष्य तीन विकेट खोकर ही प्राप्त कर लिया! रोहित शर्मा ने इस मैच में अपने एकदिवसीय करियर का दूसरा शतक १०१ बनाते हुए भारत को आसान जीत के करीब पहुचाया साथ ही साथ विराट कोहली की ८२ रनों की पारी भी श्रीलंका पर भारी पड़ी!सुरेश रैना की युवा बिग्रेड के सामने श्रीलंका हर समय संघर्ष करता नजर आया!इस जीत के साथ ही यह भी तय हो गया है की टीम इंडिया की यह युवा टीम हर टीम को हराने में सक्षम नजर आ रही है, आखिर युवाओं ने अपना जोश दिखा ही दिया!

Saturday, May 29, 2010

एक और हार

जिम्बाम्बे में खेली जा रही तीन देशो की एकदिवसीय श्रृंखला में भारत को एक बार फिर हार का सामना करना पड़ा! सुरेश रैना के नेतृत्व में टीम इंडिया की युवा बिग्रेड जिम्बाम्बे की नोसिखिया टीम से क्रिकेट के हर क्षेत्र में पीछे नजर आई! युवा बिग्रेड ने हालांकि २८५ रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया लेकिन जिम्बाम्बे के विकेटकीपर बल्लेबाज ब्रेंडन टेलर की ८१ रनों की पारी और अपना पहला एकदिवसीय मैच खेल रहे क्रेग इरविन के द्वारा बनाये गए ६१ की बदोलत जिम्बाम्बे ने यह मैच दस गेंद शेष रहते जीत लिया! जिम्बाम्बे ने इस मैच में जीत हासिल करते हुए भारत के खिलाफ ५०वे एकदिवसीय मैच में ९वी जीत आठ साल के लम्बे अंतराल के बाद हासिल की,उसने भारत के खिलाफ अंतिम मैच २००२ में जीता था इस हार ने टीम इंडिया की युवा बिग्रेड को ये सोचने पर मजबूर कर दिया है की ये तो शुरुआत है और आगे श्रीलंका जैसी आग है!

Thursday, May 13, 2010

शतरंज के मोहरों ने लिखी आनंद की दांस्ता

शतरंज की दुनिया में कई खिताब अपने नाम कर चुके विश्व चैम्पियन विश्वनाथन आनंद ने अपने नाम के अनुरूप खेल का प्रदर्शन करते हुए भारत को शतरंज का बादशाह बनाने में अहम् योगदान ही नहीं दिया है बल्कि वो शतरंज की हर कसोटी पर चेक पे चेक लगा कर विपक्षी को मात देते नजर आये है! ४ बार के विश्व विजेता आनंद सबसे कम उम्र के विश्व विजेता बनने गोरव भी हासिल कर चुके है, विश्व शतरंज प्रतियोगिता २०१० में बुल्गारिया के वेसलिन टोपालोव को हराकर विजेता बने आनंद शतरंज में आनंद की नई दास्ताँ लिखते हुए नजर आ रहे है!शतरंज के मोहरों के बीच आनंद बहुत ही गंभीर न होकर आनंद के साथ हर मुकाबले को अंजाम देते है उनके द्वारा बिछाई गई यह विसात हर खिलाड़ी को नजरअंदाज कर देती है लेकिन आनंद बस आनंद के साथ सब कुछ कर देते है, आखिर ये हमारे भारत के आनंद है!

बोक्सिंग का मिनी क्यूबा- भिवानी

बीजिंग ओलंपिक में मुक्केबाजी की दहशत की शुरुआत और विश्व मुक्केबाजी प्रतियोगिता में उस दहशत से सबको हैरान कर देने वाले विजेंद्र सिंह ने भिवानी को पूरी दुनिया में अपनी मुक्केबाजी की वजह से पहचान दिलाई है शायद यही वजह है की दुनिया अब भिवानी को मुक्केबाजी का मिनी क्यूबा के नाम से पुकार रही है! भिवानी के कालूबास गाँव के रहने वाले विजेंद्र सिंह मुक्केबाजी में भारत का नाम पूरी दुनिया में चमका रहे है, बीजिंग ओलंपिक में कांस्य पदक से शुरू हुआ उनका सफ़र विश्व मुक्केबाजी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक तक जा पहुंचा, जहां उन्होंने क्यूबा के मुक्केबाजों पर भारतीय मुक्केबाजी की छाप छोड़ दी थी! अपनी मुक्केबाजी से पूरी दुनिया को मदहोश कर देने वाले विजेंद्र ने मुक्केबाजी को नए आयाम देने का साहस किया वही मुक्केबाजी प्रसंसको ने उन्हें नया आदर्श मान लिया है, फिलहाल वो विश्व मुक्केबाजी में शीर्ष पर जमे हुए है! विजेंद्र जितने अपने मुक्कों के पंच के लिए जाने जाते है उतने ही आकर्षक वो शारीरिक रूप से भी है! लेक्मे इंडिया फैशन वीक में रेम्प पर भी वो सबको मदहोश कर चुके है, भिवानी की शान में विजेंद्र के साथ अब एक नाम और जुड़ गया है और वो है विश्व युवा जूनियर चैम्पियन -विकाश यादव! भिवानी के ही विकाश यादव बेडमिन्टन की दुनिया में अपने देश के नाम रोशन करना चाहते थे लेकिन किस्मत के खेल निराले है जो चाहा वो हो न सका! बेडमिन्टन की जगह अब मुक्कों ने ले ली थी
विकाश ने पुणे की स्पोर्ट्स अकादमी को अपने सपने को पूरा करने के लिए चुना और अपने पंच के लिए पहचाने जाने लगा! सफ़र की शुरुआत एशियाई युवा चैम्पियन बनने के साथ हुई! मुक्केबाजी का सफ़र अब उनका विकाश करने लगा और धीरे -धीरे वो मुक्केबाजी में पहचाने जाने लगे! उनके इस सफ़र को आगे बढाया कोच गणपति मनोहरन ने, जो उन्हें इसी वर्ष अजरबेजान की राजधानी बाकू में आयोजित विश्व युवा जूनियर मुक्केबाजी प्रतियोगिता में अपने साथ लेकर गए! विकाश ने प्रतियोगिता के शुरूआती मुकाबले आसानी से जीत कर बाकू में भारत का डंका बजा दिया था लेकिन उनकी सेमी-फाइनल की डगर कठिन साबित हुई यहाँ उनका सामना जर्मनी के थामस बाह्रेन्होल्ट से होने वाला था जो मुक्केबाजी में जर्मनी को कई खिताब दिला चुके थे लेकिन विकाश ने अपने कोच की आशा को हकीकत में बदल कर मुकाबला ८ -० के विशाल अंतर से जीत कर फाइनल में प्रवेश किया और फिर फाइनल भी जीत कर दुनिया के युवा मुक्केबाज बनने का गोरव हासिल किया यक़ीनन पहले विजेंद्र और अब विकश ने दुनिया में भारतीय मुक्केबाजी को नई पहचान दी है,अगर भिवानी ऐसे ही मुक्केबाजों को जन्म देता रहा तो शायद वह क्यूबा को भी पीछे छोड़ देगा और भारतीय मुक्केबाजी की गूंज सारी दुनिया में सुनाई देगी!



संजय शर्मा
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता
एवं जनसंचार विश्वविद्यालय,भोपाल