क्या हम फिर से मिलने आयेंगे क्या हम फिर प्यार का का घर बनायेंगे
ये वक़्त साथ देगा सोचता हूँ एक पल सोचता हूँ फिर टहर जाता हूँ
लेकिन क्या कहू क्या करू कुछ समझ नही आता क्या करू अब तो
कुछ हम पर भी अहसान करो अब मेरी गलती माफ़ करो
मेरा ऐसा अपना पण ले डूबा मुझे माफ़ कर k
Saturday, June 4, 2011
Wednesday, May 25, 2011
एयर इंडिया की साईं पर शाही जीत
ऐशबाग स्टेडियम पर 65 वें ओबेदुल्लाह गोल्ड हॉकी टूर्नामेंट के अंतर्गत कल खेले गए पूल अ के मैच में अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों से सुसज्जित एयर इंडिया ने साईं को ४-३ से हराकर लम्बी उड़ान भरी! अजलान शाह हॉकी टूर्नामेंट में भारतीय हॉकी टीम का नेतृत्व करने वाले स्टार फॉरवर्ड खिलाड़ी अर्जुन हलप्पा, शिवेंद्र सिंह, समीर दाद, की मोजुदगी में एयर इंडिया ने सेकिंड हाल्फ तक आक्रामक खेल दिखाते हुए धनराज पिलाई, समीर दाद, के गोलों कि मदद से स्कोर को ३-१ तक पहुचा दिया था साईं का खेल दुसरे हाल्फ के अंत तक सामान्य रहा लेकिन अंतिम १० मिनट में किये तीन गोलों ने उनको बरावरी पर पहुचा दिया था लेकिन खेल के अंतिम समय में मिले पनाल्टी कार्नर के सहारे एयर इंडिया जीत के पायदान पर चढ़ गया! साईं के अर्राफ उर्रहमान को उनके अच्छे प्रदर्शन के लिए" प्लयेर ऑफ़ दी मैच' दिया गया"
Tuesday, March 8, 2011
देश के ह्रदय ने रचा कीर्तिमान
रांची में आयोजित ३४वें राष्ट्रीय खेलों में मध्यप्रदेश ने लगाया पदकों का शतक, अब तक का श्रेष्ठ प्रदर्शन कर जीते १०३ पदक
सुख का दाता, सब का साथी, अपना मध्य प्रदेश है...गीत की ये पंक्तिया देश के ह्रदय यानी मध्य प्रदेश में वर्तमान समय में हर तरफ गुंजायमान है! ये पंक्तिया प्रदेश के गौरव गाथा का बखान बड़े ही अनुपम ढंग से कर लगातार युवाओ को प्रेरित कर रही है! गीत की पंक्तियों का असर अभी हाल ही रांची में आयोजित राष्ट्रीय खेलों में भी देखने को मिला जहा ये पंक्तियाँ प्रदेश के खिलाड़ियों को लगातार जीत के लिए प्रेरित करती दिखाई दे रही थी और प्रदेश के रणबांकुरे कीर्तिमान पे कीर्तिमान गढ़ते जा रहे थे! झारखण्ड की राजधानी रांची में हुए ३४वें राष्ट्रीय खेलों में देश के ह्रदय ने अब तक हुए राष्ट्रीय खेलों का सर्वश्रेष्ट प्रदर्शन कर पदकों का शतक लगाया! राष्ट्रीय खेलों में हमने २५ स्वर्ण, ३२ रजत और ४६ कांस्य सहित १०३ पदक जीतकर नया कीर्तिमान गढ़ा! यह हमारा इन खेलों के दौरान अब तक का श्रेष्ठ प्रदर्शन था इससे पहले २००७ में गुवाहाटी में आयोजित ३३वें राष्ट्रीय खेलों में प्रदेश के खिलाड़ियों ने १२ स्वर्ण, १९रजत और १९ कांस्य सहित ६३ पदक जीतकर पदक तालिका में १२वां स्थान प्राप्त किया! लेकिन इस बार देश के दिल ने खेलों में नई इबारत गढ़कर पदक तालिका में सीधे ४ स्थानों की छलांग के साथ ८वां पायदान हासिल किया! झीलों के शहर में लगातार अभ्यासरत केनोइंग व क्याइंग के खिलाड़ियों ने सबसे ज्यादा पदक जीतकर भोपाल की बड़ी झील को गौरवान्वित करने का मौका प्रदान किया! प्रदेश के स्टार तैराक संदीप सेजवाल ने ३ स्वर्ण, १ रजत और १ कांस्य के साथ पांच पदक जीतकर सबसे ज्यादा पदक अपनी झोली में डाले! संदीप सेजवाल ने पानी से सोना निकाल कर प्रदेश की धरा को स्वर्णिम कर दिया! खेलों के दौरान तैराकी स्पर्धा में प्रदेश के नाम एक नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी देखने को मिला जब संदीप सेजवाल ने ५०मीटर ब्रेस्ट स्ट्रोक तैराकी स्पर्धा २९:०३ सेकंड में पूरी की! पानी में गढ़ा गया यह रिकॉर्ड भावी खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनने का काम करेगा! प्रदेश के खिलाड़ियों ने कुश्ती, बुशु, कराटे, ताइक्वान्दो, शूटिंग, बोक्सिंग में भी अपनी प्रतिभा दिखा सफलता के झंडे गाढ़ दिए! राष्ट्रीय खेलों का ताज भले ही सेना को चला गया लेकिन देश का ह्रदय अपने खिलाड़ियों के द्वारा रची गई ऐतिहासिक विजय गाथा से गदगद नजर आ रहा है! जिस प्रदेश में खेलों को संवारने के लिए अथक प्रयास किये जा रहे है उस प्रदेश की अपने खिलाड़ियों से यही उम्मीद है की वे अपना और अपने प्रदेश का लगातार डंका बजाते रहे! अंत में मध्य प्रदेश गीत की पंक्तियों का अंत प्रदेश और उसके रणबांकुरों को समर्पित है जो कुछ इस तरह है...हॉकी की नर्सरी,जलक्रीड़ाये, खेल यहाँ अनेक है, देश का ह्रदय हर खेल में खिलाडियों से लवरेज है!
यही धरा है जिस पर जड़ा दोहरा शतक सचिन ने, यही धरा है जहा से निकले समीर और शिवेंद्र है!
सुख का दाता, सब का साथी, शुभ का ये संकेत है, माँ की गोद,पिता का आश्रय अपना मध्य प्रदेश है!
सुख का दाता, सब का साथी, अपना मध्य प्रदेश है...गीत की ये पंक्तिया देश के ह्रदय यानी मध्य प्रदेश में वर्तमान समय में हर तरफ गुंजायमान है! ये पंक्तिया प्रदेश के गौरव गाथा का बखान बड़े ही अनुपम ढंग से कर लगातार युवाओ को प्रेरित कर रही है! गीत की पंक्तियों का असर अभी हाल ही रांची में आयोजित राष्ट्रीय खेलों में भी देखने को मिला जहा ये पंक्तियाँ प्रदेश के खिलाड़ियों को लगातार जीत के लिए प्रेरित करती दिखाई दे रही थी और प्रदेश के रणबांकुरे कीर्तिमान पे कीर्तिमान गढ़ते जा रहे थे! झारखण्ड की राजधानी रांची में हुए ३४वें राष्ट्रीय खेलों में देश के ह्रदय ने अब तक हुए राष्ट्रीय खेलों का सर्वश्रेष्ट प्रदर्शन कर पदकों का शतक लगाया! राष्ट्रीय खेलों में हमने २५ स्वर्ण, ३२ रजत और ४६ कांस्य सहित १०३ पदक जीतकर नया कीर्तिमान गढ़ा! यह हमारा इन खेलों के दौरान अब तक का श्रेष्ठ प्रदर्शन था इससे पहले २००७ में गुवाहाटी में आयोजित ३३वें राष्ट्रीय खेलों में प्रदेश के खिलाड़ियों ने १२ स्वर्ण, १९रजत और १९ कांस्य सहित ६३ पदक जीतकर पदक तालिका में १२वां स्थान प्राप्त किया! लेकिन इस बार देश के दिल ने खेलों में नई इबारत गढ़कर पदक तालिका में सीधे ४ स्थानों की छलांग के साथ ८वां पायदान हासिल किया! झीलों के शहर में लगातार अभ्यासरत केनोइंग व क्याइंग के खिलाड़ियों ने सबसे ज्यादा पदक जीतकर भोपाल की बड़ी झील को गौरवान्वित करने का मौका प्रदान किया! प्रदेश के स्टार तैराक संदीप सेजवाल ने ३ स्वर्ण, १ रजत और १ कांस्य के साथ पांच पदक जीतकर सबसे ज्यादा पदक अपनी झोली में डाले! संदीप सेजवाल ने पानी से सोना निकाल कर प्रदेश की धरा को स्वर्णिम कर दिया! खेलों के दौरान तैराकी स्पर्धा में प्रदेश के नाम एक नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी देखने को मिला जब संदीप सेजवाल ने ५०मीटर ब्रेस्ट स्ट्रोक तैराकी स्पर्धा २९:०३ सेकंड में पूरी की! पानी में गढ़ा गया यह रिकॉर्ड भावी खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनने का काम करेगा! प्रदेश के खिलाड़ियों ने कुश्ती, बुशु, कराटे, ताइक्वान्दो, शूटिंग, बोक्सिंग में भी अपनी प्रतिभा दिखा सफलता के झंडे गाढ़ दिए! राष्ट्रीय खेलों का ताज भले ही सेना को चला गया लेकिन देश का ह्रदय अपने खिलाड़ियों के द्वारा रची गई ऐतिहासिक विजय गाथा से गदगद नजर आ रहा है! जिस प्रदेश में खेलों को संवारने के लिए अथक प्रयास किये जा रहे है उस प्रदेश की अपने खिलाड़ियों से यही उम्मीद है की वे अपना और अपने प्रदेश का लगातार डंका बजाते रहे! अंत में मध्य प्रदेश गीत की पंक्तियों का अंत प्रदेश और उसके रणबांकुरों को समर्पित है जो कुछ इस तरह है...हॉकी की नर्सरी,जलक्रीड़ाये, खेल यहाँ अनेक है, देश का ह्रदय हर खेल में खिलाडियों से लवरेज है!
यही धरा है जिस पर जड़ा दोहरा शतक सचिन ने, यही धरा है जहा से निकले समीर और शिवेंद्र है!
सुख का दाता, सब का साथी, शुभ का ये संकेत है, माँ की गोद,पिता का आश्रय अपना मध्य प्रदेश है!
Sunday, March 6, 2011
उम्दा बल्लेबाजी, गुमशुदा गेंदबाजी
२८ साल बाद विश्व कप जीतने का सपना संजोए बैठी टीम इंडिया ने उपमहाद्वीप में खेले जा रहे विश्व कप के दशवे संस्करण के शुरूआती मुकाबले में कमजोर बांग्लादेश को ८७ रन से हराकर २००७ में मिली हार का हिसाब चुकता किया! वही इंग्लिश टीम के खिलाफ खेला गया दूसरा मैच रोमांच के चरम पर पहुँच कर टाई हो गया! टीम इंडिया के दोनों मैचों का विश्लेषण करने पर ये साफ़ जाहिर हो गया की जहा हमारे बल्लेबाज उम्दा प्रदर्शन कर रहे है वही हमारे गेंदबाज विश्व कप में अब तक छाप छोड़ने में नाकामयाब साबित हुए है!
छाया "वी" फेक्टर का दबंग- बांग्लादेश से चार साल पहले मिली हार का जख्म शायद अब तक भरा नही था जिसने पहले दौर की बाधा पार करने से पहले ही टीम इंडिया को घर वापस भेज दिया! उन्ही जख्मो को भरने का ये सुनहरा मौका था जिसमे टीम इंडिया ने फतह हासिल की! दशवे संस्करण की शुरूआती जंग का गवाह बना मीरपुर का शेरे बांगला स्टेडियम! जहा धोनी के धुरंधरों ने ८७ रन से जीत हासिल कर चार साल पुरानी हार को पीछे छोड़ जीत के अभियान को आगे बढाया! बांग्लादेश के खिलाफ खेले गए मैच में"वी " फेक्टर यानी वीरेंदर सहवाग और विराट कोहली का दबंग हर तरफ छाया रहा! "वी" फेक्टर ने अपनी पारी के दौरान आक्रामकता, धेर्य, कलात्मकता और कौशल का परिचय देते हुए तीसरे विकेट के लिए २०३ रनों की अद्दभुत पारी खेल कमजोर मानी जा रही बंगलादेश के सामने ३७१ रनों का पहाड़ खड़ा कर दिया! जिसमे वी फॉर वीरेंदर सहवाग ने १७५ रनों की मेराथन पारी खेल न केवल भारत को जीत दिलाई बल्कि १९८३ के विश्व कप के हीरो कपिल देव के जिम्बाम्बे के खिलाफ बनाये १७५ रनों की बराबरी की! उनकी इस रिकॉर्ड तोड़ पारी में दूसरे छोर पर साथ दिया विराट कोहली ने! जिन्होंने अपने पहले ही विश्व कप में दर्शकों को शतकीय सलाम भेजा! लक्ष्य का पीछा करते हुए बांग्लादेश ने धेर्य और चार साल पहले मिली जीत का परिचय देते हुए ३७० रनों के जबाब में २८३ रन तक संघर्ष जारी रखकर अपने ऊपर से कमजोर टीम का तमगा हटाने का काम किया! इस संघर्ष में बांग्लादेशी बल्लेबाजी की रीढ़ कहे जाने वाले तमीम इकबाल ने शुरूआती समय में टीम इंडिया के गेंदबाजों की मरमम धुनाई करते हुए ७० रन ठोक डाले! बंगलादेशी कप्तान ने चतुराई भरी पारी खेलते हुए ५५ रनों का योगदान दिया लेकिन वो अपनी टीम की नैया पार लगाने में कारगर साबित नही हुए! पहले दस ओवर में तमीम इकबाल ने श्रीसंथ को लगातार अपने निशाने रखकर उन्हें गेंदबाजी की दिशा से भटका दिया! उनकी बेअसर गेंदबाजी ने उन्हें ५ ओवर में ५३ रन देने पर मजबूर कर दिया! टीम इंडिया की बल्लेबाजी में जहा लगातार सुधार देखने को मिल रहा है! वर्तमान में टीम इंडिया का टॉप बेटिंग आर्डर अन्य टीमों की तुलना में सर्वश्रेष्ठ नजर आ रहा है! वही दूसरी तरफ हमारा गेंदबाजी आक्रमण अपनी धार पूरी तरह खो चूका है!गेंदबाजी की बात करे तो एक भी गेंदबाज ऐसा नही दिख रहा जो अपने दम पर टीम इंडिया को जीत दिला सके! मिनाफ़ पटेल को छोड़ कर सभी गेंदबाज लय से भटकते नजर आ रहे है! जहीर खान जैसे गेंदबाज भी अपने आप को साबित करने में विफल रहे है जबकि श्रीसंथ सबसे ज्यादा दिशाहीन और बेअसर! टीम इंडिया विश्व कप जीतने का सपना लिए विश्व कप रुपी दंगल में ताल तो ठोकता नजर आ रहा है लेकिन गुमशुदा गेंदबाजों के दम पर हमारी ताल खोखली नजर आ रही है!
रोमांचक मैच, नतीजा टाई-बंगलादेश के खिलाफ मिली जीत से उत्साहित टीम इंडिया इंग्लॅण्ड के खिलाफ बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेले गए मैच में जीत का बचाब नही कर पाई लेकिन हार को भी गले नही लगाया! रोमांच से परिपूर्ण मैच में बाजी किसी के हाथ न लग कर टाई की स्थिथि बन गई!साँसे रोक देने वाले इस मैच ने फिर से क्रिकेट को जीत दिला दी! विश्व कप के दुसरे ग्रुप मैच में इंग्लॅण्ड के खिलाफ पहले बल्लेबाजी करने उतरी टीम इंडिया ने क्रिकेट के भगवान् कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर के एकदिवसीय मैचों में ४७वें शतक के सहारे ३३८ रनों का विशाल स्कोर खड़ा कर दिया! जिसमे युवी के तेजतर्रार ५८ रन भी शामिल थे! टीम इंडिया ने इसी के साथ लगातार दूसरी बार तीन सो का स्कोर बनाया! विशाल स्कोर का पीछा करने उतरी इंग्लिश टीम ने कप्तान स्ट्रास व पीटरसन के नेतृत्व में अच्छी शुरुआत करते हुए ९ ओवर में ६८ रन ठोक डाले!२२ गेंदों पर ३१ रन की तेजतर्रार पारी खेलने वाले पीटरसन को मुनाफ पटेल ने अपनी ही गेंद पर कैच आउट किया! पीटरसन के पेवेलियन लौट जाने के बाद ट्राट भी ज्यादा देर नही टिक सके! लेकिन इयान बेल के क्रीज पर आते ही मैच रोमांच के आगोश में समां गया! स्ट्रास व बेल ने भारतीय गेंदबाजी आक्रमण की धज्जिया उड़ाते हुए तीसरे विकेट के लिए १७० रन जोड़े! ४२वें ओवर तक इंग्लिश टीम का स्कोर २८० रन तक पहुँच चूका था एक समय ऐसा लग रहा था की ये जोड़ी आसानी से मैच को टीम इंडिया के हाथों से छीन लेगी! मैच पूरी तरह शिकंजे से निकल चूका था लेकिन तभी भारतीय गुमशुदा गेंदबाजी के तरकश से जहीर नामक तीर ने मैच के अगले ही ओवर में लगातार दो गेंदों पर स्ट्रौस व बेल को का विकेट लेकर भारत को फिर मैच में ला खड़ा किया! जहीर ने अगले ही ओवर में कोलिगवुड का विकेट भी निकाल कर मैच पर टीम इंडिया का दबदबा बना दिया! मैच में कई बार पासा पलता! कभी गेंद इंग्लिश टीम के पाले में नजर आ रही थी तो कभी टीम इंडिया के! लेकिन अंतिम २ ओवर पूरी तरह रोमांच का हिस्सा बने! यह मैच का ऐसा मोड़ था जब हर कोई प्रसंसक अपनी टीम के लिए दुआ मांग रहा था! अंतिम २ ओवर में इंग्लिश टीम को जीत के लिए २९ रनों की दरकार थी! इस समय ऐसा लग रहा थी की टीम इंडिया ये जंग जीत लेगी! लेकिन पियूष चावला के द्वारा फेंका गया ४९वां ओवर बेहद खर्चीला साबित हुआ! ब्रेसनन व स्वान ने इस ओवर में दो छक्के जड़कर १५ रन बटोर कर १ ओवर में १४ रन का फांसला रख दिया! अंतिम ओवर में रोमांच चरम सीमा को छू गया! अंतिम ओवर की अंतिम गेंद पर २ रन इंग्लिश टीम को बनाने थे लेकिन इस गेंद पर एक रन ही आ सका और इस तरह साँसे रोक देने वाला यह मैच टाई पर आकर समाप्त हो गया! दोनों टीमों के द्वारा किये गए श्रेष्ठ प्रदर्शन ने क्रिकेट की जीत पर मोहर लगा प्रसंसको को विश्व कप का अब तक का सबसे रोमांचक मुकाबले का तोहफा प्रदान किया! अब तक खेले गए विश्व कप में चार मैचों के दौरान ऐसा हुआ है जब जीत किसी भी टीम को न मिल कर टाई की स्थिथि बनी है!टाई के रूप में समाप्त हुए इस मैच ने एक बार फिर भारतीय गेंदबाजी की पोल खोल दी है! गेंदबाजी पर फिर से सवालिया निशान खड़े हो गए है की आखिर कब तक हम सिर्फ और सिर्फ बल्लेबाजों के दम पर ही जीत हासिल करते रहेंगे! क्या हमारी गेंदबाजी अभी भी गुमशुदा है ?
भगवान् के कदम "महाशतक" की ओर- क्रिकेट के भगवान, मास्टर ब्लास्टर ऐसे न जाने कितने उपनाम है जो क्रिकेट जगत और प्रसंसकों ने सचिन तेंदुलकर को उपहार स्वरुप भेंट किये है! इसके बदले सचिन ने भी उन्हें नए रिकॉर्ड के माध्यम से "रिटर्न गिफ्ट" हर मौके पर दिया है! रेकॉर्डो की इसी फेहरिस्त में उनके नाम एक और रिकॉर्ड दर्ज हो गया है विश्व कप में सर्वाधिक शतक लगाने का! टेस्ट और एकदिवसीय क्रिकेट में सर्वाधिक शतक जड़ने वाले सचिन ने विश्व कप के दशवें संस्करण में इंग्लिश टीम के खिलाफ १२० रन की लाजबाब पारी खेलकर विश्व कप में पांचवा शतक लगाया! विश्व कप में इससे पहले हमवतन सौरव गांगुली, ऑस्ट्रलियाई रिकी पोंटिंग और मार्क वा चार- चार शतक जड़ चुके है! क्रिकेट के भगवान से अब अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में एक नए रिकॉर्ड" शतकों के महाशतक की उम्मीद प्रसंसक लगाये बैठे है जिसे संभवत वह इसी महाकुम्भ में पूरा करेंगे! फिलहाल उनके नाम टेस्ट में ५१ और वनडे में ४७ शतक के साथ ९८ शतक है!
छाया "वी" फेक्टर का दबंग- बांग्लादेश से चार साल पहले मिली हार का जख्म शायद अब तक भरा नही था जिसने पहले दौर की बाधा पार करने से पहले ही टीम इंडिया को घर वापस भेज दिया! उन्ही जख्मो को भरने का ये सुनहरा मौका था जिसमे टीम इंडिया ने फतह हासिल की! दशवे संस्करण की शुरूआती जंग का गवाह बना मीरपुर का शेरे बांगला स्टेडियम! जहा धोनी के धुरंधरों ने ८७ रन से जीत हासिल कर चार साल पुरानी हार को पीछे छोड़ जीत के अभियान को आगे बढाया! बांग्लादेश के खिलाफ खेले गए मैच में"वी " फेक्टर यानी वीरेंदर सहवाग और विराट कोहली का दबंग हर तरफ छाया रहा! "वी" फेक्टर ने अपनी पारी के दौरान आक्रामकता, धेर्य, कलात्मकता और कौशल का परिचय देते हुए तीसरे विकेट के लिए २०३ रनों की अद्दभुत पारी खेल कमजोर मानी जा रही बंगलादेश के सामने ३७१ रनों का पहाड़ खड़ा कर दिया! जिसमे वी फॉर वीरेंदर सहवाग ने १७५ रनों की मेराथन पारी खेल न केवल भारत को जीत दिलाई बल्कि १९८३ के विश्व कप के हीरो कपिल देव के जिम्बाम्बे के खिलाफ बनाये १७५ रनों की बराबरी की! उनकी इस रिकॉर्ड तोड़ पारी में दूसरे छोर पर साथ दिया विराट कोहली ने! जिन्होंने अपने पहले ही विश्व कप में दर्शकों को शतकीय सलाम भेजा! लक्ष्य का पीछा करते हुए बांग्लादेश ने धेर्य और चार साल पहले मिली जीत का परिचय देते हुए ३७० रनों के जबाब में २८३ रन तक संघर्ष जारी रखकर अपने ऊपर से कमजोर टीम का तमगा हटाने का काम किया! इस संघर्ष में बांग्लादेशी बल्लेबाजी की रीढ़ कहे जाने वाले तमीम इकबाल ने शुरूआती समय में टीम इंडिया के गेंदबाजों की मरमम धुनाई करते हुए ७० रन ठोक डाले! बंगलादेशी कप्तान ने चतुराई भरी पारी खेलते हुए ५५ रनों का योगदान दिया लेकिन वो अपनी टीम की नैया पार लगाने में कारगर साबित नही हुए! पहले दस ओवर में तमीम इकबाल ने श्रीसंथ को लगातार अपने निशाने रखकर उन्हें गेंदबाजी की दिशा से भटका दिया! उनकी बेअसर गेंदबाजी ने उन्हें ५ ओवर में ५३ रन देने पर मजबूर कर दिया! टीम इंडिया की बल्लेबाजी में जहा लगातार सुधार देखने को मिल रहा है! वर्तमान में टीम इंडिया का टॉप बेटिंग आर्डर अन्य टीमों की तुलना में सर्वश्रेष्ठ नजर आ रहा है! वही दूसरी तरफ हमारा गेंदबाजी आक्रमण अपनी धार पूरी तरह खो चूका है!गेंदबाजी की बात करे तो एक भी गेंदबाज ऐसा नही दिख रहा जो अपने दम पर टीम इंडिया को जीत दिला सके! मिनाफ़ पटेल को छोड़ कर सभी गेंदबाज लय से भटकते नजर आ रहे है! जहीर खान जैसे गेंदबाज भी अपने आप को साबित करने में विफल रहे है जबकि श्रीसंथ सबसे ज्यादा दिशाहीन और बेअसर! टीम इंडिया विश्व कप जीतने का सपना लिए विश्व कप रुपी दंगल में ताल तो ठोकता नजर आ रहा है लेकिन गुमशुदा गेंदबाजों के दम पर हमारी ताल खोखली नजर आ रही है!
रोमांचक मैच, नतीजा टाई-बंगलादेश के खिलाफ मिली जीत से उत्साहित टीम इंडिया इंग्लॅण्ड के खिलाफ बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेले गए मैच में जीत का बचाब नही कर पाई लेकिन हार को भी गले नही लगाया! रोमांच से परिपूर्ण मैच में बाजी किसी के हाथ न लग कर टाई की स्थिथि बन गई!साँसे रोक देने वाले इस मैच ने फिर से क्रिकेट को जीत दिला दी! विश्व कप के दुसरे ग्रुप मैच में इंग्लॅण्ड के खिलाफ पहले बल्लेबाजी करने उतरी टीम इंडिया ने क्रिकेट के भगवान् कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर के एकदिवसीय मैचों में ४७वें शतक के सहारे ३३८ रनों का विशाल स्कोर खड़ा कर दिया! जिसमे युवी के तेजतर्रार ५८ रन भी शामिल थे! टीम इंडिया ने इसी के साथ लगातार दूसरी बार तीन सो का स्कोर बनाया! विशाल स्कोर का पीछा करने उतरी इंग्लिश टीम ने कप्तान स्ट्रास व पीटरसन के नेतृत्व में अच्छी शुरुआत करते हुए ९ ओवर में ६८ रन ठोक डाले!२२ गेंदों पर ३१ रन की तेजतर्रार पारी खेलने वाले पीटरसन को मुनाफ पटेल ने अपनी ही गेंद पर कैच आउट किया! पीटरसन के पेवेलियन लौट जाने के बाद ट्राट भी ज्यादा देर नही टिक सके! लेकिन इयान बेल के क्रीज पर आते ही मैच रोमांच के आगोश में समां गया! स्ट्रास व बेल ने भारतीय गेंदबाजी आक्रमण की धज्जिया उड़ाते हुए तीसरे विकेट के लिए १७० रन जोड़े! ४२वें ओवर तक इंग्लिश टीम का स्कोर २८० रन तक पहुँच चूका था एक समय ऐसा लग रहा था की ये जोड़ी आसानी से मैच को टीम इंडिया के हाथों से छीन लेगी! मैच पूरी तरह शिकंजे से निकल चूका था लेकिन तभी भारतीय गुमशुदा गेंदबाजी के तरकश से जहीर नामक तीर ने मैच के अगले ही ओवर में लगातार दो गेंदों पर स्ट्रौस व बेल को का विकेट लेकर भारत को फिर मैच में ला खड़ा किया! जहीर ने अगले ही ओवर में कोलिगवुड का विकेट भी निकाल कर मैच पर टीम इंडिया का दबदबा बना दिया! मैच में कई बार पासा पलता! कभी गेंद इंग्लिश टीम के पाले में नजर आ रही थी तो कभी टीम इंडिया के! लेकिन अंतिम २ ओवर पूरी तरह रोमांच का हिस्सा बने! यह मैच का ऐसा मोड़ था जब हर कोई प्रसंसक अपनी टीम के लिए दुआ मांग रहा था! अंतिम २ ओवर में इंग्लिश टीम को जीत के लिए २९ रनों की दरकार थी! इस समय ऐसा लग रहा थी की टीम इंडिया ये जंग जीत लेगी! लेकिन पियूष चावला के द्वारा फेंका गया ४९वां ओवर बेहद खर्चीला साबित हुआ! ब्रेसनन व स्वान ने इस ओवर में दो छक्के जड़कर १५ रन बटोर कर १ ओवर में १४ रन का फांसला रख दिया! अंतिम ओवर में रोमांच चरम सीमा को छू गया! अंतिम ओवर की अंतिम गेंद पर २ रन इंग्लिश टीम को बनाने थे लेकिन इस गेंद पर एक रन ही आ सका और इस तरह साँसे रोक देने वाला यह मैच टाई पर आकर समाप्त हो गया! दोनों टीमों के द्वारा किये गए श्रेष्ठ प्रदर्शन ने क्रिकेट की जीत पर मोहर लगा प्रसंसको को विश्व कप का अब तक का सबसे रोमांचक मुकाबले का तोहफा प्रदान किया! अब तक खेले गए विश्व कप में चार मैचों के दौरान ऐसा हुआ है जब जीत किसी भी टीम को न मिल कर टाई की स्थिथि बनी है!टाई के रूप में समाप्त हुए इस मैच ने एक बार फिर भारतीय गेंदबाजी की पोल खोल दी है! गेंदबाजी पर फिर से सवालिया निशान खड़े हो गए है की आखिर कब तक हम सिर्फ और सिर्फ बल्लेबाजों के दम पर ही जीत हासिल करते रहेंगे! क्या हमारी गेंदबाजी अभी भी गुमशुदा है ?
भगवान् के कदम "महाशतक" की ओर- क्रिकेट के भगवान, मास्टर ब्लास्टर ऐसे न जाने कितने उपनाम है जो क्रिकेट जगत और प्रसंसकों ने सचिन तेंदुलकर को उपहार स्वरुप भेंट किये है! इसके बदले सचिन ने भी उन्हें नए रिकॉर्ड के माध्यम से "रिटर्न गिफ्ट" हर मौके पर दिया है! रेकॉर्डो की इसी फेहरिस्त में उनके नाम एक और रिकॉर्ड दर्ज हो गया है विश्व कप में सर्वाधिक शतक लगाने का! टेस्ट और एकदिवसीय क्रिकेट में सर्वाधिक शतक जड़ने वाले सचिन ने विश्व कप के दशवें संस्करण में इंग्लिश टीम के खिलाफ १२० रन की लाजबाब पारी खेलकर विश्व कप में पांचवा शतक लगाया! विश्व कप में इससे पहले हमवतन सौरव गांगुली, ऑस्ट्रलियाई रिकी पोंटिंग और मार्क वा चार- चार शतक जड़ चुके है! क्रिकेट के भगवान से अब अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में एक नए रिकॉर्ड" शतकों के महाशतक की उम्मीद प्रसंसक लगाये बैठे है जिसे संभवत वह इसी महाकुम्भ में पूरा करेंगे! फिलहाल उनके नाम टेस्ट में ५१ और वनडे में ४७ शतक के साथ ९८ शतक है!
Wednesday, February 23, 2011
चार दावेदारों के बीच की प्रतिस्पर्धा
एशिया महाद्वीप में खेले जा रहे १०वें क्रिकेट संग्राम में प्रतिस्पर्धा केवल चार टीमों के बीच ही दिखाई दे रही है! इन सब के बीच ही असली जंग होने को है! जिसका आधार एक नया रोमांच लेकर आएगा! इस रोमांच में एक नै लहर देखने को मिलेगी! यही लहर पूरे महाद्वीप ही नही बल्कि पूरे विश्व में लगातार अपनी जड़े हम बी कोशिश हम कहना जय लेकिन लेकिन हमारा लेकिन kuch हमारा कुछ कहना है लेकिन हम फिर भी कुछ कहना है! फिर भी हम कुछ कर सके फिर भी ऐसा मुमकिन नही है! दावेदारों के बीच की इस जुंग में करीब अहसास आ गया है लेकिन किस्मत जीत का पैगाम लेके का कुछ भी है लेकिन कुछ भी है हम पर ऐसा क्या कहना है है हम पर जो अह्स्सा के काबिल फिर भी हम पर दबाब रहेगा तब तक यहाँ कुछ भी नही है अब लें लेकिन क्या काया कुह भी है लेकिन हम पर भी लेकिन हमर फिर भी हम ऐसा यकीन है कुछ समय के बाद हमारा इंतकाम यजीन में जाना c
Tuesday, October 12, 2010
कॉमनवेल्थ में छाई स्वर्णिम शतकीय दबंगाई

दिल्ली में चल रहा कॉमनवेल्थ फीवर रंगारंग समापन के साथ ख़त्म हुआ! २०१४ में होने वाले कॉमनवेल्थ के लिए ग्लासगो (स्कॉट्लैंड ) के प्रतिनिधियों को ध्वज प्रदान करके औपचारिक पूर्ति की गई! खेलों के इस अर्द्ध कुम्भ ने भारतीय खेल पटल पर एक नया अध्याय सकुशल पूरा किया! १९८२ में दिल्ली में हुए एशियाड के बाद २८ साल के बाद यह हमारे देश में खेलों का अब तक का सबसे बड़ा आयोजन था! कॉमनवेल्थ खेलों में हो रहे भ्रस्टाचार की परत खुल जाने से यह मुद्दा ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटिश मीडिया में लगातार छाया रहा! खेलों के दौरान अर्थात खेलों से पहले कलमाड़ी का भ्रस्टाचार में दबंग और खेलों के अंत तक हमारे देश के खिलाड़ी अपने सुनहरे पदकों का दबंग दिखाते नजर आ रहे है! हमारे देश के लिए यह पहला मौका था जब हम विश्व के ७१ देशों के ८००० से अधिक खिलाड़ियों के इस अर्द्ध कुम्भ का आयोजन करने में जुटे थे! खिलाड़ियों के टहरने के लिए खेल गाँव को दुल्हन की तरह सजाया गया लेकिन फिर भी खेल शुरू होने से पहले हम खेलगांव की आलोचनाओं के शिकार हुए! ब्रिटिश मीडिया ने तो इसे खेलों का सबसे नकारात्मक पहलु बताया जबकि ब्रिटिश मीडिया या अन्य देशों का मीडिया यह भूल गया की वर्ष २००२ में मेनचेस्टर कॉमनवेल्थ में हमारे देश की कई खेलों की टीमो को खेलगांव के दर्शन तक नही हुए! खैर यह खेलों की आलोचनात्मक दास्ताँ थी जो वक़्त के साथ गुजर चुकी है! दिल्ली कॉमनवेल्थ में हमे वो सब कुछ मिला जिसके लिए हम अब तक सोच रहे थे!इन खेलों में हमने ३८ स्वर्ण सहित १०१ पदक हासिल करके पदकों का शतक लगाया! २००६ मेलबोर्न में हुए कॉमनवेल्थ में हम चोथे स्थान पर थे लेकिन यहाँ हमने दूसरा स्थान पाया! यह पहला मौका था जब हमने पदकों का शतक लगाकर मेनचेस्टर कॉमनवेल्थ में जीते ६९ पदकों का रिकॉर्ड तोडा!भारोत्तोलक सोनिया चानू ने रजत पदक जीतकर अभियान की शुरुआत पहले दिन ही कर दी थी अब इस अभियान में सुनहरी चमक बिखरने का समय था जिसे पूरा किया ओलंपिक स्वर्ण विजेता अभिनव बिंद्रा और गगन नारंग की स्टार जोड़ी ने! जिन्होंने २५ मीटर युगल निशानेबाजी में भारत को पहला सोना दिला सुनहरी सफलता का अहसास कराया! बिंद्रा- नारंग के द्वारा जीते सोने की सुनहरी महक ने भारत के रणबांकुरों में सोना पाने की लालसा को दुगना कर दिया जिससे भारत कॉमनवेल्थ खेलों में अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रहा! १९वें कॉमनवेल्थ खेलों में जहा हमारे देश के रणबांकुरों ने कई खेलों में रिकॉर्ड कायम किये वही कई खेलों ने हमें आशा के अनुरूप परिणाम नही दिए! डिस्कस थ्रोअर कृष्णा पुनिया ने ट्रेक एवं फिल्ड एथलीट प्रतिस्पर्धा में जहा हमे ५२ साल बाद स्वर्ण दिलाया वही बीजिंग ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता विजेंद्र से स्वर्ण की आस लगाये प्रसंसकों को उस समय निरासा मिली जब वो इन उम्मीदों पर खरा नही उतरे और मुकाबले से बाहर हो गए! क्रिकेट की लोकप्रियता के साए में जी रहे भारतीय दर्शकों को इन खेलों ने अपने साए में भरने की कोशिश तो भरपूर की लेकिन फिर भी कुश्ती, निशानेबाजी, बोक्सिंग, हॉकी को छोड़ कर अधिकतर खेल दर्शकों के लिए तरसते रहे! १९वें कॉमनवेल्थ खेलों में कुलमिलाकर ७५ रिकॉर्ड नए बने जिनमे कुछ रिकॉर्ड भारतीय खिलाडियों के हिस्से में भी आये! तीरंदाजी में झारखंड के एक ऑटो चालक की लाडली बेटी ने व्यक्तिगत व टीम स्पर्धा में दोहरी स्वर्णिम कामयाबी हासिल की! १७ साल की दीपिका ने इतनी छोटी उम्र में स्वर्णिम निशाना लगा कर कॉमनवेल्थ खेलों में तीरंदाजी का स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला होने का गौरव हासिल किया! उनकी इस स्वर्णिम दास्ताँ ने उन्हें एक ही दिन में तीरंदाजी का नया स्टार बना दिया! कॉमनवेल्थ खेलों में हॉकी की चमक एक बार फिर देखने को मिली जब राजपाल सिंह के नेतृत्व में टीम इंडिया ने पाक को ७-४ से हराकर बाहर का रास्ता दिखाया! चक दे इंडिया की गूंज अब हर तरफ गूंजने लगी थी ऐसा लग रहा था मानो टीम इंडिया के स्वर्णिम दिन फिर लौट आये है! टीम इंडिया को सेमी फ़ाइनल का टिकट कटाने के लिए बस एक और जीत की दरकार थी लेकिन इस बार मुकाबला अंग्रेजों से होने वाला था मैच के शुरू होने से लेकर अंत तक दोनों ही टीमों के खिलाड़ी एक दुसरे पर हावी रहे नतीजा मैच पर टिका और इस समय अंतिम गोल करने का दारोमदार टीम इंडिया के फॉरवर्ड खिलाड़ी शिवेंद्र सिंह पर था लेकिन शिवेंद्र ने भरोसे को हकीकत में तब्दील करके अपनी स्टिक से अंतिम समय में गोल करके फ़ाइनल में टीम इंडिया को प्रवेश कराया लेकिन जो चमक टीम इंडिया की हॉकी में अब तक नजर आ रही थी मानो ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ फ़ाइनल में वो चमक कही खो सी गई थी नतीजा हमे ८-० से अब तक की सबसे बड़ी हार झेलनी पड़ी!खैर गुमनामी के साए में डूब रहा हमारा राष्ट्रीय खेल कुछ चमक छोड़ने में तो कामयाब रहा ही साथ ही साथ हमे कॉमनवेल्थ में पहला पदक भी मिला! इन खेलों ने भारतीय नारी सब पर भारी जुमले को भी सच्चाई प्रदान की! महिलाओं ने अपनी शक्ति का परचम दिखाते हुए १०१ पदकों में से ३६ पदकों पर अपना दाव लगाया! खेलों के अंत तक एक खुली चुनोती भी देखने को मिली जब ऑस्ट्रेलिया की डिस्कस थ्रोअर में विश्व चैम्पियन रह चुकी डैनी सेमुअल्स ने कॉमनवेल्थ स्वर्ण पदक विजेता कृष्णा पुनिया को ये कहकर अपनी प्रतिक्रिया जताई की कृष्णा पुनिया ने मेरी अनुपस्थिति में स्वर्ण जीता है यदि मैं इन खेलों में प्रतियोगी होती तो मुकाबला टक्कर का होता! विश्व चैम्पियन ने कृष्णा को इस सम्बन्ध में ये कहकर पल्ला झाड दिया की मैं किसी कारणवश इन खेलों में नही आ सकी लेकिन हमारे पास अभी मौका है, कृष्णा अगर मेरी चुनोती को स्वीकार करती है तो ये मुकावला फिर हो सकता है! खैर कृष्णा इस चुनोती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है और संभवत ये मुकावला फरवरी में हो सकता है! डैनी सेमुअल्स और कृष्णा पहले भी कई बार आमने सामने हो चुकी है जिसमे कृष्णा ने विश्व चैम्पियन को एक बार हराया भी है! कॉमनवेल्थ में मिली इन उपलब्धियों ने एशियाड के लिए स्वर्णिम भविष्य की उम्मीद बरक़रार रखी है! एशियाड में सफलता का डंका बजेगा या नही ये तो एशियाड में ही पता चल पायेगा!
Tuesday, October 5, 2010
वैरी वैरी स्पेशल ने फिर खेली स्पेशल पारी
मोहाली की पिच गेंदबाजों के पक्ष में दिखाई दे रही थी! मैच के तीसरे दिन जहा एक ओर ऑस्ट्रेलिया का दबदबा बन ही रहा था की इशांत की गेंदबाजी की तेज धार कंगारुओं को काटती चली गई ! पहली पारी में २३ रनों की बढ़त लेकर कंगारुओं ने मैच में बापसी करने की कोशिश जरूर की लेकिन दूसरी पारी में वें भारतीय गेंदबाजो के जवाबी आक्रमण के फेर में फ़स गए और १९२ रनों पर ही चलते बने! २१६ रनों का लक्ष्य भारतीय बल्लेबाजों के लिए कठिन नही दिख रहा था जिस तरह भारतीय बल्लेबाजों की बल्लेबाजी का खौफ कंगारुओं के भूतकाल में दिख
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